Advertisement

दुनिया को चौंकाने वाली फिजिसिस्ट, क्यों हो रही है आइंस्टीन से तुलना?

महज 14 साल की उम्र में खुद का हवाई जहाज बनाने वाली सबरीना आज क्वांटम मैकेनिक्स और स्पेसटाइम के सबसे जटिल रहस्यों को सुलझाने में जुटी हैं.

Latest News
दुनिया को चौंकाने वाली फिजिसिस्ट, क्यों हो रही है आइंस्टीन से तुलना?

सबरीना गोंजालेज पास्टर्स्की (Image Source- Instagram/Sabrina Pasterski)

Add DNA as a Preferred Source
  • सबरीना ने 14 साल की उम्र में सिंगल-इंजन प्लेन को अकेले उड़ाकर इतिहास रचा था
  • उन्होंने एमआईटी से सिर्फ तीन साल में 5.0 की परफेक्ट जीपीए के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया 
  • पिछले दो दशकों में एमआईटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में टॉप करने वाली पहली महिला 
  • स्टीफन हॉकिंग ने अपने जीवन के अंतिम रिसर्च पेपर्स में सबरीना के नाम का जिक्र किया था

जब हमारे यहां बच्चे ड्राइविंग लाइसेंस मिलने की उम्र का इंतजार करते हैं, तब सबरीना गोंजालेज पास्टर्स्की ने न सिर्फ खुद का एक असली हवाई जहाज बना लिया था, बल्कि उसे हवा में उड़ा भी दिया था. शिकागो में जन्मी सबरीना आज की पीढ़ी की उन चुनिंदा सैद्धांतिक भौतिकविदों में से हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने अपने आखिरी समय में जो रिसर्च पेपर लिखे, उनमें सबरीना के काम का जिक्र किया था.

ब्रह्मांड के सबसे जटिल अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में जुटी सबरीना हाल ही में मेट गाला 2026 में अपनी अनोखी एंट्री को लेकर सुर्खियों में आईं. दुनिया उन्हें अगला अल्बर्ट आइंस्टीन कहती है, हालांकि वे खुद इस बड़े टैग को बहुत सहजता से लेती हैं और खुद को सुर्खियों से दूर रखना पसंद करती हैं.

झाड़ू पर उड़ने की जिद से शुरू हुआ एविएशन का सफर

1993 में जन्मी सबरीना का बचपन बाकी बच्चों से काफी अलग था. हाल ही में 'द टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने मजेदार किस्सा साझा किया कि वे बचपन में पॉप सिंगर बनना चाहती थीं. लेकिन जब उन्होंने हैरी पॉटर फिल्म देखी, तो अपने पिता से जिद की कि उन्हें झाड़ू पर बैठ कर उड़ना है.

बेटी की इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उनके पिता ने उन्हें एविएशन की दुनिया से रूबरू करा दिया. महज 9 साल की उम्र से उन्हें फ्लाइंग लेसन्स मिलने लगे. सबरीना कहती हैं कि इकलौती संतान होने की वजह से उनके माता-पिता ने अपनी सारी जमा-पूंजी और संसाधन उनके सपनों में लगा दिए. जब वे 12 साल की हुईं, तो उन्होंने अपने घर के गैरेज में ही जेनिथ जोडिएक विमान के पार्ट्स को असेंबल करना शुरू कर दिया.

लगभग दो साल की कड़ी मेहनत के बाद, 14 साल की उम्र में उन्होंने इस सिंगल-इंजन प्लेन को अकेले उड़ाकर इतिहास रच दिया. इस कामयाबी का वीडियो जब उन्होंने टेक दिग्गज जेफ बेजोस को भेजा, तो बेजोस इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सबरीना को अपनी एयरोस्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन आने का न्योता दिया और भविष्य में नौकरी की पेशकश भी कर दी.

एमआईटी और हार्वर्ड में प्रतिभा का लोहा मनवाया 

सबरीना सिर्फ इंजीनियरिंग में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी जीनियस रहीं. जब उन्होंने मशहूर एमआईटी के लिए आवेदन किया, तो शुरुआत में उन्हें वेटिंग लिस्ट में रखा गया था, लेकिन उनके खुद के बनाए विमान के प्रोजेक्ट ने उनका दाखिला पक्का करा दिया. उन्होंने रिकॉर्ड तीन साल में 5.0 की परफेक्ट जीपीए के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया, और पिछले दो दशकों में एमआईटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में टॉप करने वाली पहली महिला बनीं.

इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी पूरी की. यहां रिसर्च के दौरान उन्होंने स्पिन मेमोरी इफेक्ट (गुरुत्वाकर्षण तरंगों से जुड़ा एक सिद्धांत) पर काम किया, जिसने स्टीफन हॉकिंग का ध्यान खींचा. सबरीना का मुख्य काम आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत और क्वांटम मैकेनिक्स के बीच के फासले को पाटना है, जो कि आधुनिक विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.

करोड़ों के ऑफर ठुकराए

सबरीना की प्रतिभा को देखते हुए नासा और कई बड़ी यूनिवर्सिटीज ने उन्हें करोड़ों रुपये के पैकेज और भारी-भरकम रिसर्च फंडिंग के ऑफर दिए. लेकिन मोटी कमाई के जाल में फंसने के बजाय, उन्होंने ब्रह्मांड के बुनियादी नियमों को समझने के लिए रिसर्च को चुना. साल 2021 में वे कनाडा के प्रतिष्ठित 'पेरिमीटर इंस्टीट्यूट फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' से जुड़ीं.

साल 2023 में उनके एक इंटरनेशनल प्रोग्राम सेलेस्टियल होलोग्राफी इनिशिएटिव को साइमन्स फाउंडेशन से 80 लाख डॉलर (करीब 66 करोड़ रुपये) का बड़ा ग्रांट मिला, जिसमें हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक मिलकर काम कर रहे हैं.

ब्लैकबोर्ड से सीधे मेट गाला 2026 के रेड कार्पेट तक

जटिल गणित के फॉर्मूलों में डूबी रहने वाली सबरीना को साल 2026 के मेट गाला में देखना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था. उन्हें ऑस्ट्रेलियाई अरबपति एंथनी प्रैट ने इनवाइट किया था, जो खुद फिजिक्स के बड़े दीवाने हैं. सबरीना का मानना है कि इस तरह की लाइमलाइट का इस्तेमाल वे विज्ञान और रिसर्च के लिए बड़े बिजनेसमैन से फंडिंग जुटाने के लिए एक ब्रिज के रूप में करना चाहती हैं. 

ये भी पढ़ें- कौन हैं वियतनाम नाव हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय? दूतावास ने जारी की मृतकों की सूची, जानिए कैसे हुआ हादसा

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement