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नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी Gen-Z आंदोलन के बाद पीएम ओली के इस्तीफे और बालेन शाह और सुषिला कार्की के पीछे हटने के बाद कुलमान घीसिंग अंतरिम सरकार के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं.
नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे और काठमांडू के मेयर बालेन शाह व पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की के पीछे हटने के बाद अब एक नया नाम सामने आया है. यह नाम है कुलमान घीसिंग का, जिन्हें नेपाल की नई पीढ़ी यानी Gen-Z खुले तौर पर समर्थन दे रही है. बताते चलें घीसिंग को साफ-सुथरी छवि और उनके कामकाज के लिए जाना जाता है.
गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री ओली को Gen-Z युवाओं के जबरदस्त प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देना पड़ा था. देश की बागडोर फिलहाल नेपाली सेना के हाथों में आ गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अंतरिम सरकार की कमान किसे मिलेगी. बताते चलें बालेन शाह ने सरकार का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया, वहीं सुषिला कार्की को उम्र और कानूनी अड़चनों के चलते बाहर कर दिया गया. अब कुलमान घीसिंग इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.
54 वर्षीय घीसिंग मूल रूप से इंजीनियर हैं और नेपाल बिजली प्राधिकरण (NEA) के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं. उन्हें उस समय राष्ट्रीय पहचान मिली जब उन्होंने काठमांडू घाटी से लंबे समय तक चल रही लोडशेडिंग को खत्म किया. इस काम के लिए उन्हें जनता के बीच 'पावर मैन' के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि मार्च 2025 में सरकार ने उन्हें NEA प्रमुख पद से हटा दिया था.
घीसिंग का जन्म 25 नवंबर 1970 को बेथन, रामेछाप में हुआ. उन्होंने भारत के जमशेदपुर स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में पुलचोक इंजीनियरिंग कॉलेज, नेपाल से भी अपनी पढ़ाई जारी रखी. साथ ही उन्होंने MBA भी किया. नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना ने अभी देश की कमान अपने हाथ में ले रखी है. वहीं Gen-Z युवाओं ने सेना मुख्यालय जाकर मांग की है कि कुलमान घीसिंग को अंतरिम सरकार का नेता बनाया जाए. अगर ऐसा होता है, तो यह नेपाल की राजनीति में युवाओं की सबसे बड़ी जीत साबित हो सकती है.
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