दुनिया
पाकिस्तानी फौज अफगानिस्तान के खास इलाके 'वाखान कॉरिडोर' को अपने कब्जे में करना चाहती है. अफगानिस्तान के ये क्षेत्र उसी तरह से अहम है जैसे भारत के लिए जम्मू-कश्मीर. ऐसे में आइए जनते हैं कि ये कॉरिडोर जियोपॉलिटिक्स और इतिहास के नजरिए से कितना महत्वपूर्ण है.
पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच पिछले कई दिनों से युद्ध की स्थिति बनी हुई है. जानकारों के मुताबिक दोनों दोशों के बीच फुलफ्लेज युद्ध भी हो सकता है. इस समय जारी संघर्ष में दोनों ही तरफ से दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है. इधर पाकिस्तान की निगाह अफगानिस्तान की चिकननेक माने जाने वाले वाखान कॉरिडोर को अपने कब्जे में करने की है. आइए जनते हैं कि ये कॉरिडोर जियोपॉलिटिकल और ऐतिहासिक नजरिए से कितना महत्वपूर्ण है.
क्या है वाखान कॉरिडोर?
वाखान कॉरिडोर मूल रूप से अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत का हिस्सा है. इस गलियारे के तहत अफ़गानिस्तान की सरहद चीन और भारत से जुड़ती है. लेकिन पाकिस्तान के पास पीओके जाने के पश्चात अब इसकी सीमा भारत से नहीं लगती है. एक जमाने में इसे रूस और ब्रिटिश इंडिया के बीच बफर जोन के तौर पर बनाया गया था. सदियों से ये क्षेत्र व्यापार के लिए ख़ास रहा है. ये किसी जमाने में सिल्क रूट का भी हिस्सा हुआ करता था.
वाखान कॉरिडोर क्यों है इतना खास?
वाखान अफ़ग़ानिस्तान और चीन के बीच एक छोटा सा गलियारा है. साथ ही ये ताजिकिस्तान और पाकिस्तान को बंटता हैं. हालांकि पाकिस्तान के ये काफ़ी कठिन है कि वो इसे हड़प ले क्योंकि चीन और अफ़गानिस्तान दोनों ही ऐसा नहीं चाहेंगे. चीन अफ़गानिस्तान के साथ अपना बॉर्डर आगे भी शेयर करना चाहेगा. सामरिक नज़रिए से ये चीन के लिए बेहद अहम है. वहीं पाकिस्तान के लिये भी ये क्षेत्र बेहद उपयोगी साबित हो सकता है. यदि वखान कॉरिडोर का आधिपत्य पाकिस्तान के पास आ गया तो वो ताजिकिस्तान के साथ इस रूट के ज़रिए सीधा व्यापार कर सकता है, साथ ही उसे दूसरे सेंट्रल एशियन देशों तक भी पहुंचने का एक सीधा रास्ता मिल जाएगा बिना अफ़गानिस्तान के मदद लिए.
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