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अमेरिकी वॉचडॉग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिका को 37.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है और उसके पास एडवांस्ड मिसाइलों व हथियारों का भारी संकट खड़ा हो गया है.
अमेरिका की एक सरकारी जांच एजेंसी ने ईरान युद्ध के सैन्य और आर्थिक नुकसान की अब तक की सबसे साफ तस्वीर पेश की है. पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की इस नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस जंग की वजह से अमेरिकी सेना के पास आधुनिक हथियारों और मिसाइलों की भारी कमी हो गई है, और नए हथियार बनाने की रफ्तार बेहद धीमी पड़ी है.
यह रिपोर्ट 1 अप्रैल से 30 जून की अवधि को कवर करती है, जिसे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन), विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) की साझा जांच के बाद तैयार किया गया है.
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि युद्ध के चलते अमेरिका के पास उन्नत हथियारों के स्टॉक में भारी गिरावट आई है. साथ ही, नए हथियारों की सप्लाई चैन में गंभीर अड़चनें पैदा हो गई हैं. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को अपनी मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम के स्टॉक को युद्ध से पहले वाले स्तर पर वापस लाने में कम से कम 3 साल का समय लग जाएगा.
वाशिंगटन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी सैन्य ताकत और तैयारी को कमजोर किए बिना अपने सहयोगी देशों को हथियारों की सप्लाई कैसे जारी रखे.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के हमलों में मिडिल ईस्ट के कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेसों की सैकड़ों इमारतें या तो पूरी तरह तबाह हो गईं या उन्हें गंभीर नुकसान हुआ. इसके अलावा अमेरिका के दर्जनों लड़ाकू विमान और ड्रोन भी इस हमले की चपेट में आकर नष्ट हो गए।.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संसद को बताया कि जुलाई तक इस जंग में अमेरिका को लगभग 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये) का खर्चा उठाना पड़ा था. वहीं, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में मौजूद अमेरिकी दूतावासों और राजनयिक ठिकानों को लगभग 184 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपये) का नुकसान पहुंचा है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, जून की शुरुआत तक युद्ध से जुड़ा कुल खर्च 113 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें से 80 मिलियन डॉलर आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों पर खर्च हुए.
जंग शुरू होने के बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट और यूरोप के अलग-अलग देशों से करीब 9,000 अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला. इस बचाव अभियान में जून के अंत तक 11 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हुए. सरकार ने इन नागरिकों से सफर का कोई किराया या खर्चा वापस न लेने का फैसला किया है.
अपने खुद के हथियारों के स्टॉक में भारी कमी आने के बावजूद, अमेरिका ने इस दौरान सहयोगी देशों को हथियार बेचना जारी रखा. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इस अवधि में 44 अरब डॉलर से ज्यादा के आपातकालीन और सामान्य सैन्य सौदे किए.
हथियार खरीदने वालों में सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब रहा, जिसने अमेरिका से अटैक हेलीकॉप्टर, गोला-बारूद और एडवांस्ड सटीक मिसाइलें खरीदीं. इसके अलावा कतर, कुवैत, यूएई और इजरायल ने भी अमेरिका से अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण और हथियार खरीदे.
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