दुनिया
60 दिनों की अस्थायी समय-सीमा खत्म होने के बाद ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने तटस्थ माने जाने वाले इस खाड़ी देश को अचानक इस अंतरराष्ट्रीय संकट के केंद्र में ला खड़ा किया है.
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब खाड़ी देश ओमान भी इस विवाद की चपेट में आता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और साफ लहजे में चेतावनी दी है कि अगर उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की अमेरिकी कोशिशों में कोई रुकावट डाली, तो उसके खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी.
ट्रंप के इस बयान ने दशकों से निष्पक्ष और तटस्थ रहे ओमान को अचानक अमेरिका और ईरान की जंग के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. ये बयान तब आया है जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60 दिनों का अस्थायी समझौता किसी अंतिम सहमति के बिना खत्म हो गया.
एक टीवी इंटरव्यू के दौरान रविवार को जब ट्रंप से ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलमार्ग को लेकर चल रही बातचीत पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अगर ओमान बीच में आया तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. वे उन्हें बम से उड़ा देंगे. साथ ही उन्होंने ईरान को जंग खत्म करने के लिए पूरी तरह आत्मसमर्पण करने को कहा. यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओमान को ऐसी चेतावनी दी है.
इससे पहले भी मई में वे ओमान और ईरान के बीच जलमार्ग टैक्स को लेकर हो रही चर्चाओं पर सख्त नाराजगी जता चुके हैं. दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान मौजूद है. दुनिया भर में तेल और व्यापार की आपूर्ति के लिए यह रास्ता बेहद अहम माना जाता है.
ओमान हमेशा से अमेरिका और ईरान दोनों के बीच एक बिचौलिए और मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है. प्रस्तावित योजना के मुताबिक, जहाजों की आवाजाही के लिए ओमान के समुद्री इलाके में एक सुरक्षित रास्ता बनाया जाना था, जिसमें ईरान का सहयोग भी शामिल था. इसी वजह से इस पूरे मामले में ओमान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है. हालांकि, अमेरिका चाहता है कि इस रास्ते पर ईरान का कोई नियंत्रण या टैक्स न हो और पूरी सुरक्षा व्यवस्था अमेरिका और ओमान के हाथों में रहे.
वहीं दूसरी ओर, ईरान चाहता है कि जब तक उस पर से कड़े प्रतिबंध और अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी नहीं हटती, तब तक वह जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खुलने देगा. ट्रंप की यह सीधी धमकी इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि ओमान हमेशा से अमेरिका का एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार रहा है और अपने देश में अमेरिकी सैन्य अड्डों को इस्तेमाल करने की इजाजत देता है.
इस तरह के आक्रामक रवैये से खाड़ी के बाकी देशों में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं और वे अमेरिका पर अपनी निर्भरता को लेकर दोबारा सोचने पर मजबूर हो सकते हैं. इसके अलावा, अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है या यहां तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.
फिलहाल 60 दिनों की समय सीमा खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की उम्मीद कम नजर आ रही है. जहां एक तरफ ट्रंप सरकार ओमान पर अमेरिकी शर्तों को मानने का दबाव बना रही है, वहीं ओमान के सामने अपनी तटस्थता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.