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जॉर्डन में ईरान समर्थित हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ लगातार सातवीं रात ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की है.
US Iran War Update: मिडिल ईस्ट में हालात बेहद नाजुक हो चुके हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब एक बड़े युद्ध का रूप लेता जा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति के सीधे आदेश पर शनिवार (18 जुलाई 2026) शाम को ईरान के खिलाफ एक और बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया गया.
इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन रही ईरानी सैन्य ताकत को ध्वस्त करना और जॉर्डन में अमेरिकी फौज पर हुए घातक हमलों का बदला लेना है, जिसके पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ बताया जा रहा है.
तनाव की शुरुआत तब और गंभीर हो गई जब जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए भीषण बमबारी की गई. इस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई, जबकि एक जवान अभी भी लापता है जिसकी तलाश की जा रही है. अमेरिकी सेना के नियमों के मुताबिक, मारे गए सैनिकों के परिवारों को सूचित किए जाने के 24 घंटे बाद ही उनके नामों का खुलासा किया जाएगा.
इस हमले में घायल हुए चार सैनिकों को तुरंत जॉर्डन के स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अब छुट्टी दे दी गई है. वहीं, मामूली चोटों का शिकार हुए अन्य सैनिक प्राथमिक चिकित्सा लेकर वापस मोर्चे पर तैनात हो चुके हैं. गौरतलब है कि इस ताजा संघर्ष के शुरू होने के बाद से अब तक दम तोड़ने वाले अमेरिकी सैनिकों का आंकड़ा 16 तक पहुंच गया है, जबकि 430 से अधिक जवान चोटिल हुए हैं.
पेंटागन ने साफ किया है कि वह ईरान को संभलने का कोई मौका नहीं देना चाहता. शनिवार को लगातार सातवीं ऐसी रात थी जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी ठिकानों पर बमों की बारिश की. इस नए हमले में ईरान के खुफिया निगरानी केंद्रों, सेना के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, जमीन के नीचे बने आधुनिक हथियार डिपो और उनकी नौसैनिक क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.
अमेरिकी कार्रवाई से भड़के ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका को बेहद आक्रामक लहजे में चेतावनी दी है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर वाशिंगटन ने अपनी सैन्य हरकतों को तुरंत नहीं रोका, तो उसे ऐसा ऐतिहासिक सबक सिखाया जाएगा जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा.
खामेनेई ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले किसी भी पुराने या नए समझौते की अब ईरान की नजर में कोई कानूनी या कूटनीतिक वैधता नहीं रह गई है. धमकी देने के साथ ही ईरान ने व्यावहारिक पलटवार भी शुरू कर दिया है. ईरानी सेना ने कुवैत, इराक, बहरीन, जॉर्डन और सऊदी अरब में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागीं.
इस जवाबी कार्रवाई में सबसे ज्यादा नुकसान कुवैत को उठाना पड़ा है, जहां एक बड़े तेल डिपो और समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले वॉटर प्यूरीफिकेशन प्लांट को निशाना बनाया गया है. इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं और युद्ध की आग भड़कने की आशंका तेज हो गई है.
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