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अब 60 दिन का समय खत्म हो चुका है और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का कहना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है.
US-Iran Ceasefire: दो महीने पहले अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर साइन हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की समयसीमा सोमवार (17 अगस्त, 2026) को समाप्त हो रही है. तीन महीने से ज्यादा समय तक चली इस जंग में हजारों लोगों की जान गई है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई. एमओयू में सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थाई रूप से बंद करने के लिए अंतिम समझौते की बात कही गई थी.
अब 60 दिन का समय खत्म हो चुका है और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का कहना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है. ईरानी न्यूज एजेंसी IRIB के अनुसार अब्बास अराघची ने कहा कि अभी तक सिर्फ मध्यस्थों के जरिए ही बात हुई है, सीधे तौर पर अमेरिका के साथ ईरान की कोई बातचीत नहीं हुई. अराघची ने कहा कि अमेरिका पहले ही ईरान पर हमले शुरू करके एमओयू का उल्लंघन कर चुका है.
ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने को लेकर बात चल रही है. उन्होंने बताया कि फिलहाल टेंपरेरी नया रूट बनाने पर चर्चा चल रही है, जिसे बाद में परमानेंट रूट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है और जल्दी ही इसे लेकर कोई फाइनल फैसला लिया जाएगा. अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तभी दोबारा खुलेगा, जब अमेरिका ईरान की सभी शर्तों पर राजी हो जाएगा.
17 जून को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने तत्काल और स्थाई रूप से सैन्य कार्रवाई खत्म करने के लिए सीजफायर एमओयू साइन किया था. एमओयू में 60 दिनों के सीजफायर के दौरान एक अंतिम समझौता करने की बात कही गई थी. इसके तहत 30 दिन में होर्मुज में अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करनी थी और अंतिम समझौते के बाद ईरान के आसपास से सेना हटानी थी, ईरान के पुननिर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के पैकेज पर काम करने, प्रतिबंध हटाने और ईरानी तेल निर्यात के लिए छूट देने पर भी सहमत होना था. एमओयू में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थाई रूप से रोकने की घोषणा की गई थी.
एमओयू के तहत बात हुई थी कि ईरान को होर्मुज से समुद्री बारूदी सुरंगें हटानी थीं और 60 दिन तक तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही पर कोई शुल्क नहीं लगानो था. वहीं, ईरान ने परमाणु हथियार हासिल नहीं करने और यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दों पर बातचीत की भी बात कही थी.
60 दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होना था, लेकिन एमओयू साइन होने के नौ दिन बाद ही दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करते हुए हमलों की शुरुआत कर दी थी. अमेरिका ने ईरान पर एमओयू के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए, इसे मूर्खतापूर्ण कदम बताया. वहीं, ईरान ने अमेरिकी स्ट्राइक को एमओयू के आर्टिकल 1 का उल्लंघन करार दिया.
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार 7 जुलाई को ट्रंप ने समझौता खत्म होने का दावा करते हुए ईरान पर एक के बाद एक लगातार हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कहा कि अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया और सारे वादों से मुकर गया है. इसके साथ ईरान ने भी जवाब में हमले शुरू कर दिए.
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