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ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ का किया ऐलान, क्या भारत में महंगी होंगी दवाइयां? जानिए क्या होगा असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से विदेशी जेनेरिक दवाओं पर 200% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने के ऐलान ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है.

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ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ का किया ऐलान, क्या भारत में महंगी होंगी दवाइयां? जानिए क्या होगा असर

ट्रंप का एक और टैरिफ बम (Image Source- Magnific & IANS)

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  • अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया गया
  • 1 अगस्त 2026 से पहले दो साल के लिए टैक्स 0% रहेगा 
  • तीसरे साल (2028) में इसे बढ़ाकर 100% और चौथे साल से 200% किया जाएगा
  • भारत से अमेरिका की करीब 40% जेनेरिक दवाएं जाती हैं

अमेरिका ने विदेश से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ (इम्पोर्ट टैक्स) लगाने की योजना का ऐलान किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, इसका मुख्य मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन वापस अमेरिका में ही शुरू करवाना है. इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाएं सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है.  

ट्रंप ने क्या कहा?

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बुधवार (22 जुलाई 2026) को ट्रंप ने इस नई नीति की जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि यह टैक्स चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. शुरुआती 2 साल (1 अगस्त 2026 से) में अमेरिका में आने वाली तमाम जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ रहेगा यानी दो साल तक कंपनियों को पूरी छूट मिलेगी. तीसरे साल (2028) से इस छूट के खत्म होते ही टैरिफ को बढ़ाकर सीधे 100% कर दिया जाएगा. चौथे साल से आगे इसके बाद विदेशी जेनेरिक दवाओं पर 200% का भारी टैक्स लगेगा.  

अमेरिका में दवाओं के उत्पादन को लेकर लिया फैसला

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह कदम अमेरिका में जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को वापस लाने के लिए उठाया गया है. जो कंपनियां दी गई समय-सीमा के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाएंगी, उन्हें इस टैक्स के जरिए सजा दी जाएगी. उन्होंने यह भी साफ किया कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड या नई इनोवेटिव दवाओं पर पुरानी नीति ही लागू रहेगी और उसमें कोई बदलाव नहीं होगा.

भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?  

भारत को दुनिया भर में "दुनिया की फार्मेसी" के नाम से जाना जाता है. अमेरिकी बाजार में मिलने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से लगभग 40% हिस्सा अकेले भारत से जाता है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2024-2025 में अमेरिका को करीब 9.7 अरब डॉलर की दवाएं बेची थीं. ये भारत के कुल दवा निर्यात (25.8 अरब डॉलर) का 38% हिस्सा है.

अमेरिका में बीपी, शुगर, डिप्रेशन, कैंसर और इन्फेक्शन जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भारतीय जेनेरिक दवाओं का ही इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है. फाइनेंशियल पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में अमेरिका में दी जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों का लगभग 65% हिस्सा सिर्फ दो भारतीय कंपनियां- ग्लैंडमार्क और लुपिन सप्लाई कर रही थीं.  

फिलहाल यह पूरी तरह साफ नहीं है कि भारतीय कंपनियां इस फैसले से कैसे निपटेंगी. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापारिक समझौता भी हुआ है, जिसमें जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल को लेकर आपसी बातचीत से रास्ता निकालने की बात कही गई थी. 

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