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List of shame: बम-बारूद के बीच टूट रहा बचपन, UN ने जारी की डराने वाली रिपोर्ट

UN के 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों के खिलाफ हिंसा एक अगल स्तर पर पहुंच गई है. रिपोर्ट में 41,370 गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें 4,500 से अधिक बच्चों की मौत और 7,000 घायल हुए हैं.

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 List of shame: बम-बारूद के बीच टूट रहा बचपन, UN ने जारी की डराने वाली रिपोर्ट

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संयुक्त राष्ट्र ने 19 जून 2025 को एक बेहद चौंकाने वाली वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2024 में विश्वभर के संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों के खिलाफ हिंसा एक अनोखे स्तर पर पहुंच गई. गाजा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, यूक्रेन और हैती जैसे क्षेत्रों में बच्चों के साथ हो रहे गंभीर अपराधों में 25% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि पिछले 30 वर्षों में सबसे अधिक है.  

हजारों बच्चों पर कहर 

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 41,370 गंभीर उल्लंघनों की पुष्टि की गई है, जिनमें से कई हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और जमीनी लड़ाइयों के दौरान हुईं. 

4,500 से अधिक बच्चों की मौत 

लगभग 7,000 घायल, कई बच्चे स्कूलों और अस्पतालों जैसे संरक्षित स्थानों पर भी मारे गए या घायल हुए.  2024 का आंकड़ा 2023 की तुलना में कहीं अधिक है, जबकि 2023 में ही 21% की वृद्धि देखी गई थी. 

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र 

UN रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे अधिक बच्चों के खिलाफ हिंसा गाजा में हुई. 8,500 उल्लंघन दर्ज, जिनमें 1,259 बच्चों की मौत की पुष्टि.  इसके अतिरिक्त 4,470 मौतों की अभी पुष्टि बाकी है. 

अन्य प्रभावित देश

कांगो: 4,000+ गंभीर उल्लंघन 

सोमालिया: 2,500+ 

नाइजीरिया: लगभग 2,500 

हैती: 2,200+ 

“शर्म की सूची” और अंतरराष्ट्रीय रिएक्शन

UN रिपोर्ट के अंत में “शर्म की सूची” भी प्रकाशित की गई है, जिसमें उन संगठनों और देशों के नाम हैं जो बच्चों के खिलाफ इन अपराधों के लिए ज़िम्मेदार हैं.  संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने कहा, “22,495 मासूम बच्चों की चीखें हमें रातभर जगाए रखने के लिए काफी हैं. ये बच्चे किताबों और खिलौनों से खेलने की उम्र में बमों और गोलियों से जूझ रहे हैं. यह समय चेतने का है.” 


अब भी समय है जागने का 

रिपोर्ट एक वैश्विक चेतावनी है कि अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां युद्ध की भेंट चढ़ती रहेंगी. यह समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर बच्चों की रक्षा के लिए सख्त और ठोस कदम उठाने होंगे.  

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