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इस्तांबुल में पहली बैठक, बांग्लादेश को न्योता… क्या आकार ले रहा है ‘इस्लामिक NATO’?

तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ऐतिहासिक 'मक्का सैन्य समझौता' किया है. इस समझौते के बाद इनकी पहली बैठक इस्तांबुल में होने जा रही है. इसके लिए बांग्लादेश को भी न्योता मिला है.

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इस्तांबुल में पहली बैठक, बांग्लादेश को न्योता… क्या आकार ले रहा है ‘इस्लामिक NATO’?

मक्का समझौते की पहली बैठक इस्तांबुल में होने जा रही है, AI and X Photo

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  • तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 7 अगस्त को मक्का रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए.
  • सोमवार को इस्तांबुल में तीनों देशों के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुखों की पहली बैठक होने जा रही है.
  • मिस्र और बांग्लादेश को भी इस गठबंधन में शामिल करने की तैयारी की जा रही है.
     

Mecca Joint Defence Agreement: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है. तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान इन तीनों प्रमुख मुस्लिम देशों ने मिलकर एक नया और बेहद शक्तिशाली रक्षा गठबंधन तैयार किया है, जिसे 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' नाम दिया गया है. सोमवार को इस गठबंधन की पहली कमेटी बैठक तुर्की के शहर इस्तांबुल में होने जा रही है.

इस ऐतिहासिक बैठक में तीनों देशों के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख शामिल होने वाले हैं. यह गठबंधन ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. 

क्या है मक्का सैन्य समझौता?

7 अगस्त को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे 'मक्का पैक्ट' नाम दिया गया. ये तीनों देश सुन्नी मुस्लिम-बहुसंख्यक देश हैं और लंबे समय से अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे हैं.

यह समझौता तब हुआ है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को छह महीने हो चुके हैं और शांति वार्ताएं पूरी तरह से रुकी हुई हैं. इस युद्ध के दौरान खाड़ी देशों के तेल निर्यातकों को निशाना बनाकर ईरानी मिसाइलें भी दागी गईं. इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सोमवार को इस्तांबुल में होने वाली पहली बैठक बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें गठबंधन को जमीन पर उतारने और आगे की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी.

कैसे काम करेगा यह गठबंधन?

इस समझौते की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से नाटो की तर्ज पर तैयार किया गया है. इसका नियम कहता है कि यदि इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर कोई सशस्त्र हमला या आक्रामकता होती है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. यह बिल्कुल नाटो के 'आर्टिकल 5' जैसा सामूहिक रक्षा का नियम है.

इस्तांबुल में होने वाली बैठक का मुख्य एजेंडा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और तीनों देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है. इसके तहत सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना और रक्षा उद्योग में साझा उत्पादन व विकास को बढ़ावा देना शामिल है. हालांकि, समझौते में अभी तक किसी विस्तृत सैन्य या ऑपरेशनल वादों का खुलकर उल्लेख नहीं किया गया है.

कौन-कौन से देश हो सकते हैं शामिल?

तुर्की ने बताया है कि यह समझौता किसी पुरानी ट्रीटी या अलायंस को खत्म करने के लिए नहीं है, बल्कि यह नया गठबंधन आगे विस्तार के लिए पूरी तरह से ओपन है. इस मक्का पैक्ट में मिस्र को शामिल होने वाले सबसे मजबूत और पोटेंशियल कैंडिडेट के रूप में देखा जा रहा है, वहीं सऊदी अरब ने बांग्लादेश को भी इस सैन्य समझौते में शामिल होने का न्यौता दिया है. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि उन्हें न्योता मिला है, हालांकि इसमें शामिल होने की कोई निश्चित समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है. 

दूसरी तरफ, इस पूरे सीन के बीच ईरान का कहना है कि उन्हें इस पैक्ट में शामिल होने का कोई ऑफिशियल न्योता नहीं मिला है, हालांकि रीजनल सिक्योरिटी के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए प्रपोजल्स जरूर सामने आए हैं.
 

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