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अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के दबाव में क्या राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ युद्ध को धीमा करेंगे? जानिए इस तनावपूर्ण संघर्ष के पीछे की पूरी सियासी कहानी और सैन्य विकल्प.
US Midterms Iran War: ईरान तनाव के बीच नवंबर 2026 में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, जिससे अमेरिका के भीतर लगातार बढ़ती महंगाई, फ्यूल की आसमान छूती कीमतों और युद्ध के प्रति जनता के भारी विरोध के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस तनाव को फिलहाल कम करने का भारी राजनीतिक दबाव है. अमेरिका में होने वाले ये मिडटर्म चुनाव असल में यह तय करेंगे कि अमेरिकी संसद पर राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कंट्रोल बरकरार रहेगा या नहीं.
एक पोल के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि केवल 31 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ही इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि 63 प्रतिशत जनता इसके विरोध में है. युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग भी 40 प्रतिशत से गिरकर महज 33 प्रतिशत पर आ गई है. यही कारण है कि नवंबर तक इस युद्ध को सीमित या नियंत्रित रखना ट्रंप सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक मजबूरी बन गया है.
ट्रंप प्रशासन फिलहाल सैन्य ताकत के बजाय आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान को घेरने की कोशिश कर रहा है. अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने 'इकोनॉमिक डी-डे' की घोषणा करते हुए उन 60 संस्थाओं पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए जो ईरान को तेल राजस्व हासिल करने में मदद करती हैं. इसके साथ ही अन्य देशों को भी ईरान के साथ व्यापार करने पर द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकी दी गई है. इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना लगातार हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है ताकि उसके तेल निर्यात को पूरी तरह से रोका जा सके.
राजनीतिक दबाव के बावजूद सैन्य मोर्चे पर अमेरिकी नीतियां उलझी हुई नजर आ रही हैं. एक तरफ प्रतिबंध लगाए जाते हैं और दूसरी तरफ फिर से बमबारी शुरू कर दी जाती है. हाल ही में दक्षिणी ईरान के कुहेस्ताक में एक अमेरिकी हमले में नागरिक ठिकाने को निशाना बनाया गया, जिसमें बच्चों समेत चार नागरिकों की मौत हो गई.
इसके अलावा, अमेरिकी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष कमांडरों ने पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ को लिखित रूप में चेतावनी दी है कि इस गति से युद्ध को जारी रखना अब संभव नहीं है. इससे दुनिया के अन्य हिस्सों में अमेरिकी सेना की युद्ध तैयारियों पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है.
जानकारों के मुताबिक, नवंबर के चुनावों के परिणाम इस युद्ध के भविष्य को पूरी तरह बदल देंगे. यदि रिपब्लिकन पार्टी जीती तो ट्रंप इसे युद्ध के लिए जनता की हरी झंडी मान सकते हैं और नवंबर के बाद सैन्य अभियान को और भी तेज कर सकते हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारी पहले से ही चुनाव के बाद के सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. वहीं, अगर डेमोक्रेट्स को संसद के किसी भी सदन में बहुमत मिलता है, तो वे फंडिंग रोककर और जांच समितियां बैठाकर ट्रंप के हाथ बांध सकते हैं.