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नेपाल और भारत की सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच पीढ़ियों से रिश्तेदारियां हैं. भारत-नेपाल के कूटनीतिक संबंध चाहे कैसे भी हों, इस पर कभी असर नहीं पड़ा. यही वजह है कि नेपाल में अशांति भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है....
गदर फिल्म का तारा सिंह याद है? वही जो अपनी माशूका को लाने के लिए भारत से पाकिस्तान चला गया. दुश्मन देश में गैरकानूनी तरीके से घुसने के बाद उसने अकेले ही पाक सेना और पुलिस को नाको चने चबवा दिए थे. हालांकि, फिर भी अपनी सकीना को हासिल करने के लिए उसे हैंड पंप उखाड़ना पड़ा था.
नेपाल में अशांति के बीच ऐसा ही एक किस्सा सामने आया है. नेपाल में जेन-जी के आंदोलन और तख्तापलट के बाद अव्यवस्था का माहौल है. जेल से कैदी भाग रहे हैं, यहां-वहां हिंसक घटनाएं हो रही हैं और अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि अगली सरकार कैसी होगी. अशांति के चलते नेपाल से लगी भारत की सीमा पर जबरदस्त सुरक्षा है. नेपाल की ओर से भारत में एंट्री पर पाबंदी है.
इस सबके बीच नेपाल के भैरहवा का एक युवक 8 सितंबर को मोटरसाइकिल से भारत की सीमा की ओर चला. लोगों ने रोका, लेकिन वो नहीं माना. अकेले ही बॉर्डर पर पहुंच गया. सीमा पर भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने रोका तो उसने बताया कि उत्तर प्रदेश के नौतनवा में आज उसकी शादी होनी है. सुरक्षाकर्मियों ने कुछ देर पूछताछ की, डॉक्यूमेंट्स देखे और फिर आने दिया. शाहनवाज नाम के उस युवक का अब निकाह हो चुका है. नेपाल के तारा सिंह की इस कहानी में ही भारत-नेपाल संबंधों का मर्म छिपा है. इन दो देशों के बीच कूटनीतिक से ज्यादा बेटी-रोटी का रिश्ता है. सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच पीढ़ियों से रिश्तेदारियां हैं. भारत-नेपाल के कूटनीतिक संबंध चाहे कैसे भी हों, इस पर कभी असर नहीं पड़ा. यही वजह है कि नेपाल में अशांति भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है.
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सबसे नजदीकी पड़ोसी होने के चलते नेपाल और भारत की सांस्कृतिक विरासतें भी कॉमन हैं. एक बात और, शहाबुद्दीन नाम का ये नेपाली तारा सिंह जब भारतीय सीमा की ओर बढ़ा तो उसे भरोसा था कि कोई खून-खराबा नहीं होगा. उसे ये भी विश्वास था कि सुरक्षाकर्मी उसे भारतीय सीमा में घुसने देंगे. यही भरोसा और विश्वास भारत और नेपाल के बीच का संबंधों का मुख्य आधार है. बॉर्डर के तारा सिंह को पता था कि सकीना को हासिल करने के लिए उसे दुश्मनों से भिड़ना होगा. शाहनवाज को विश्वास था कि उसका काम दोस्त का भरोसा जीतने भर से हो जाएगा.
यही भरोसा सुशीला कार्की के उस बयान में भी नजर आया जिसमें उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. बुधवार को उन्होंने कहा कि वे मोदी की कार्यशैली से प्रभावित हैं और उनसे काफी उम्मीदें भी रखती हैं. ये वही सुशीला कार्की हैं जिन्हें नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. नेपाल हमेशा ही भारत से उम्मीदें रखता रहा है. सुरक्षा से लेकर रोजाना के जरूरी सामान तक- भारत परंपरागत रूप से नेपाल का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है. भारत और नेपाल के बीच की सीमा लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी है. ये पांच राज्यों से होकर गुजरती है – सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड. ये सीमा ज्यादातर खुली है, यानी कोई दीवार या फेंसिंग नहीं है.
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इस सीमा की कहानी 1815-16 के एंग्लो-नेपाल युद्ध से शुरू हुई जब नेपाल की गोरखा सेना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ रही थी. युद्ध में नेपाल की हार तय थी और वैसा ही हुआ. इसके बाद 2 दिसंबर 1815 को सुगौली संधि पर हस्ताक्षर हुए. 4 मार्च 1816 को लागू हुई इस संधि के तहत नेपाल के करीब एक-तिहाई हिस्से पर ब्रिटिश भारत का कब्जा हो गया. इसमें ज्यादातर तराई के इलाके शामिल थे. इसी संधि में काली नदी (महाकाली) को पश्चिमी सीमा निर्धारित किया गया, जो आज तक विवाद का कारण बना हुआ है. इस संधि में कई कमियां थीं. संधि के समय बनाए गए नक्शे सटीक नहीं थे. नदियों के रास्तों में बदलाव और जंगलों ने सीमा को और अस्पष्ट बना दिया. नतीजा ये हुआ कि कई गांव और खेत बंट गए. घर भारत में तो खेत नेपाल में चला गया.
आजादी के बाद भारत ने नेपाल के साथ बेहतर संबंधों को लेकर खास प्रयास किए. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और नेपाल के राजा वीर विक्रम शाह के बीच काफी करीबियां थीं. 1950 में दोनों देशों के बीच शांति और मैत्री संधि हुई. इसमें सुगौली की संधि को आधार बनाया गया, लेकिन सीमा का मुद्दा आज भी अनसुलझा है. बीते 75 साल में कई बार इस संधि की शर्तों के खिलाफ आवाजें उठीं. नेपाल में इंडिया गो बैक के नारे भी लगे, लेकिन आम नेपाली नागरिक को तब भी ये भरोसा था कि उसके देश पर कोई मुसीबत आई तो भारत मदद के लिए जरूर आएगा. रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बीच ये विश्वास दो हजार के दशक के शुरुआती सालों तक बना रहा. नेपाल में राजतंत्र के अंत और नई लोकतांत्रिक व्यवस्था में वामपंथियों के प्रभुत्व के बाद इस विश्वास में कमी आई है. नेपाली प्रधानमंत्रियों के चीन प्रेम से भारत नाराज हुआ तो इस इलाके में पाकिस्तान की सक्रियता ने उसे चौंकाया. काठमांडू में आईएसआई नेटवर्क के अलावा नेपाल सीमा के जरिए आतंकी, असलहा और ड्रग्स का कारोबार भारत के लिए चिंता का कारण है. समस्या ये भी है कि हाल के वर्षों में चीन ने नेपाल में बड़े पैमाने पर निवेश किया है.
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नेपाल में अशांति या चीन और पाकिस्तान की सक्रियता को लेकर भारत की चिंता का एक पहलू व्यावसायिक भी है. दरअसल, भारत नेपाल को 7 बिलियन डॉलर से अधिक का माल निर्यात करता है. दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 8 बिलियन डॉलर का है. भारत इसमें खलल नहीं चाहता. दोनों देशों के लोग अच्छे रिश्ते चाहते हैं. यही दोनों देशों के हित में भी है, लेकिन ये तभी संभव है जब नेपाल के नए हुक्मरान भारत पर विश्वास दिखाएं. सुशीला कार्की ने इसी का संकेत दिया है.
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