Advertisement

शिव मंदिर बना थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध का कारण? प्रधानमंत्री तक को गंवानी पड़ी थी कुर्सी, यहां समझिए विवाद के पीछे की पूरी कहानी

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शिव मंदिर को लेकर बढ़ा सीमा विवाद हिंसा में बदल गया है. दोनों देश लगातार एक दूसरे पर हमलावर हैं. इसी मामले में थाई प्रधानमंत्री को विवादित कॉल के चलते कुर्सी गंवानी पड़ी थी.

Latest News
शिव मंदिर बना थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध का कारण? प्रधानमंत्री तक को गंवानी पड़ी थी कुर्सी, यहां समझिए विवाद के पीछे की पूरी कहानी

Thailand Cambodia conflict

Add DNA as a Preferred Source

Thailand Cambodia Conflict: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक प्राचीन मंदिर को लेकर फिर से तनाव गहरा गया है. दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए हैं और बॉर्डर पर लगातार भीषण झड़पें हो रही हैं. आपको बता दें कुछ दिन पहले ही थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतर्न शिनावात्रा को भी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था. 1100 साल पुराना यह शिव मंदिर, जो कभी सिर्फ आस्था का प्रतीक था, आज दोनों देशों के लिए राष्ट्रगौरव और राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है. थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद एक बार फिर हिंसक हो गया है. गुरुवार सुबह सीमा पर हुई गोलीबारी में कम से कम 9 नागरिकों की जान चली गई, जबकि 14 से अधिक लोग घायल हो गए. थाई सेना ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में कंबोडिया के दो सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं. 

पूरे संघर्ष की जड़ में है शिव मंदिर

दरअसल, इस पूरे संघर्ष की जड़ में है, प्रेह विहेयर मंदिर, जिसे 9वीं सदी में खमेर सम्राट सूर्यवर्मन ने भगवान शिव के लिए बनवाया था. मंदिर कंबोडिया में है लेकिन थाईलैंड इसका दावा करता है. 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था, लेकिन थाईलैंड ने उस फैसले को कभी पूरी तरह से नहीं स्वीकारा. 

प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा था

2008 में जब कंबोडिया ने इस मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाया, तो विवाद फिर से भड़क उठा. सीमा के पास सैन्य झड़पें शुरू हो गईं जो कई साल तक चलीं. 2011 में तो हालात इतने खराब हुए कि करीब 36,000 लोगों को विस्थापित होना पड़ा था.  आपको बताते चलें 2 जुलाई 2025 को एक और बड़ा मोड़ आया, जब थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतर्न शिनावात्रा को अदालत ने निलंबित कर दिया. इसके पीछे की वजह बनी एक लीक कॉल जिसमें वे कंबोडिया के एक वरिष्ठ नेता को 'चाचा' कह रही थीं. जनता ने इसे राष्ट्र के सम्मान के खिलाफ माना और इसका राजनीतिक दबाव इतना बढ़ा कि प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा था. 


यह भी पढ़ें: Russia Plane Crash: 49 यात्रियों को लेकर जा रहा रूसी विमान क्रैश हुआ, प्लेन में सवार सभी लोगों की मौत


शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया

इस बार हिंसा की शुरुआत प्राचीन ता मुएन थॉम मंदिर के पास हुई, जहां दोनों देशों ने एक-दूसरे पर पहले फायरिंग करने का आरोप लगाया. थाई सेना ने बताया कि सीमा के कम से कम छह इलाकों में झड़पें जारी हैं. बहरहाल, मंदिर अब केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं रहा, बल्कि यह दक्षिण एशिया की राजनीति, पहचान और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया है. 

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x,   इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement