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पाकिस्तान के पंजाब में एक रैली में विधानसभा अध्यक्ष मलिक अहमद खान, प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के नेताओं के साथ मंच साझा करते नजर आए. आपको बता दें ये वही आतंकवादी है जिसे पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है.
पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर कथित नर्मी और दोहरे रवैये को लेकर एक और मामला सामने आया है. इस बार पंजाब प्रांत के कसूर शहर में आयोजित एक राजनीतिक रैली में पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा अध्यक्ष मलिक मुहम्मद अहमद खान को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष नेताओं के साथ मंच साझा करते देखा गया. यह वही संगठन है जिसे संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है. इस मंच पर लश्कर-ए-तैयबा के उपप्रमुख सैफुल्लाह अहमद उर्फ कसूरी और हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद भी मौजूद थे. इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है.
28 मई को पंजाब के कसूर जिले में आयोजित एक राजनीतिक रैली में पाकिस्तान के प्रमुख राजनेताओं और प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के नेताओं की मौजूदगी ने एक बार फिर पाकिस्तान की आतंक के प्रति नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस रैली में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष मलिक मुहम्मद अहमद खान ने मंच साझा किया लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह अहमद कसूरी और तल्हा सईद के साथ.
सैफुल्लाह अहमद उर्फ कसूरी हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी कसूरी ने रैली में भारत को 'दुश्मन' करार देते हुए कहा कि भारत के आरोपों के बाद उसकी 'लोकप्रियता' बढ़ी है. आपको बता दें तल्हा सईद, अब लश्कर का असली मुखिया माना जा रहा है.
रैली में शामिल होने पर सवाल पूछे जाने पर मलिक अहमद खान ने सफाई दी कि यह एक राजनीतिक आयोजन था और वह व्यक्तिगत संबंधों के कारण वहां पहुंचे थे. उन्होंने कहा, 'यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई दोषी है या नहीं जब तक जांच न हो.'
📍 #Exclusive 🇵🇰👹
Pakistan Punjab Assembly Speaker Malik Ahmed Khan defends Pahalgam mastermind Saifullah Kasuri and accuses India of being responsible for the Pahalgam terrorist attack
Note : On May -28, Pak politician Malik Ahmed Khan shared the stage with Talha Saeed,… pic.twitter.com/A87K6S1rlD— OsintTV 📺 (@OsintTV) June 1, 2025
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है. यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के राजनेता आतंकी संगठनों के साथ खुलेआम नजर आए हों. आपको बता दें इससे पहले भी कई मौकों पर ऐसे आरोप लग चुके हैं कि पाकिस्तान आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देता है और उन्हें 'धार्मिक' या 'जनकल्याण' के नाम पर सार्वजनिक मंचों पर लाया जाता है. दरअसल, इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह की घटनाओं को लेकर पहले से ही सतर्क हैं, लेकिन अब राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर इसका असर और गहराता दिख रहा है.
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