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Sunita Williams Returns: अंतरिक्ष की कोख में 9 महीने पलकर पृथ्वी पर आईं 'नवजात' सुनीता विलियम्स, सीख के साथ शुरू होगा नया जीवन

एक बच्चा जब अपनी मां की कोख से जन्म लेता है तो उसके लिए हर चीज नई होती है. कुछ इसी तरह से अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भी होता है. लंबे समय तक धरती से दूर रहने पर उनके शरीर में कई बदलाव आते हैं.

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Sunita Williams Returns: अंतरिक्ष की कोख में 9 महीने पलकर पृथ्वी पर आईं 'नवजात' सुनीता विलियम्स, सीख के साथ शुरू होगा नया जीवन
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मां की कोख से जन्मे बच्चे के लिए ये दनिया काी नई होती है. बच्चों को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने तक सारी चीजें सिखाई जाती है. कुछ ऐसी ही अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भी होता है. पूरे 9 महीने बाद सुनीता विलियम्स धरती पर लौट चुकी हैं. धरती और स्पेस में बहुत अंतर होता है. 9 महीने तक एक ऐसी जगह रहना जहां गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, उससे शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं. बिना गुरुत्वाकर्षण के 9 महीने तक रहना आसान नहीं है. इसका असर सुनीता के पूरे शरीर पर पड़ने वाला है. कुछ समय के लिए वो अने पैर पर भी नहीं खड़ी हो पाएंगी. ऐसे में अब उन्हें फिर से ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वो धरती पर एक बार फिर नार्मल लाइफ जी सकें. 

क्यों होते हैं बदलाव 

गुरुत्वाकर्षण की कमी से हड्डियों के घनत्व में महत्वपूर्ण और अपूरणीय कमी आती है. इससे आपकी भुजाओं, पैरों, धड़ और अन्य जगहों पर मांसपेशियां भी नष्ट हो जाती हैं, जिसमें आपका दिल भी शामिल है, क्योंकि उसे गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध रक्त पंप नहीं करना पड़ता, इसलिए उसे बहुत कम मेहनत करनी पड़ती है. अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद धरती पर फिर से ढलना कोई आम बात नहीं है. अंतरिक्ष यात्रियों को मांसपेशियों की ताकत हासिल करने, समन्वय में सुधार करने और अपने वेस्टिबुलर सिस्टम को फिर से ठीक करने के लिए महीनों तक पुनर्वास से गुजरना पड़ता है.

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कैसे होगी रिकवरी 

नासा के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्रियों को तीन फेज में रिकवरी करवाई जाती है. धरती पर लैंडिंग के तुरंत बाद, दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया. सबसे पहले उनके ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट कराए जा रहे हैं. शरीर की फ्लूड शिफ्ट को बैलेंस करने के लिए दवाएं दी जाएंगी. 

1. धरती पर लौने के बाद अब दोनों एस्ट्रोनॉट के लिए पहला टास्क दोबारा चलना सीखना है. 

  • इसमें सबसे पहले पैरों में ताकत लाने के लिए हल्के स्ट्रेचिंग और फिजियोथेरेपी शुरू होगी.
  • शुरुआती कुछ दिनों में खड़े होने कि लिए स्पोर्ट की जरूरत पड़ेगी लेकिन धीरे-धीरे मशीनों की मदद से चलने की कोशिश करवाई जाएगी और बाद में वो नॉर्मल हो जाएंगे. 

2. इसके बीद दूसरे फेज में प्रोप्रियोसेप्टिव एक्सरसाइज- यानी शरीर की मूवमेंट को पहचानने और कंट्रोल करने की एक्सरसाइज कराई जाएगी. 

  • वेट लिफ्टिंग और मसल ट्रेनिंग - ताकि सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को फिर से विकसित किया जा सके.
  • दिल और फेफड़ों की ट्रेनिंग- स्पेस से लौटने के बाद कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को फिर से मजबूत बनाना जरूरी है.

3. तीसरे फेज में फुल रिकवरी और बॉडी को पहले जैसी स्थिति में लाया जाएगा. 

  • डॉक्टरों के मुताबिक, स्पेस में रहने से हड्डियों की मजबूती पर बुरा असर पड़ता है. इसे ठीक करने के लिए ओस्टियोजेनिक लोडिंग (O Loading) एक्सरसाइज कराई जाएगी.
  • इस एक्सरसाइज में हड्डियों पर चार गुना ज्यादा वजन डालकर उन्हें मजबूत बनाया जाता है.
  • डॉक्टर्स दोनों की मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान देंगे. स्पेस में लंबा वक्त बिताने के बाद मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है. 

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