दुनिया
एक बच्चा जब अपनी मां की कोख से जन्म लेता है तो उसके लिए हर चीज नई होती है. कुछ इसी तरह से अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भी होता है. लंबे समय तक धरती से दूर रहने पर उनके शरीर में कई बदलाव आते हैं.
मां की कोख से जन्मे बच्चे के लिए ये दनिया काी नई होती है. बच्चों को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने तक सारी चीजें सिखाई जाती है. कुछ ऐसी ही अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भी होता है. पूरे 9 महीने बाद सुनीता विलियम्स धरती पर लौट चुकी हैं. धरती और स्पेस में बहुत अंतर होता है. 9 महीने तक एक ऐसी जगह रहना जहां गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, उससे शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं. बिना गुरुत्वाकर्षण के 9 महीने तक रहना आसान नहीं है. इसका असर सुनीता के पूरे शरीर पर पड़ने वाला है. कुछ समय के लिए वो अने पैर पर भी नहीं खड़ी हो पाएंगी. ऐसे में अब उन्हें फिर से ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वो धरती पर एक बार फिर नार्मल लाइफ जी सकें.
गुरुत्वाकर्षण की कमी से हड्डियों के घनत्व में महत्वपूर्ण और अपूरणीय कमी आती है. इससे आपकी भुजाओं, पैरों, धड़ और अन्य जगहों पर मांसपेशियां भी नष्ट हो जाती हैं, जिसमें आपका दिल भी शामिल है, क्योंकि उसे गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध रक्त पंप नहीं करना पड़ता, इसलिए उसे बहुत कम मेहनत करनी पड़ती है. अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद धरती पर फिर से ढलना कोई आम बात नहीं है. अंतरिक्ष यात्रियों को मांसपेशियों की ताकत हासिल करने, समन्वय में सुधार करने और अपने वेस्टिबुलर सिस्टम को फिर से ठीक करने के लिए महीनों तक पुनर्वास से गुजरना पड़ता है.
नासा के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्रियों को तीन फेज में रिकवरी करवाई जाती है. धरती पर लैंडिंग के तुरंत बाद, दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला गया. सबसे पहले उनके ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट कराए जा रहे हैं. शरीर की फ्लूड शिफ्ट को बैलेंस करने के लिए दवाएं दी जाएंगी.
1. धरती पर लौने के बाद अब दोनों एस्ट्रोनॉट के लिए पहला टास्क दोबारा चलना सीखना है.
2. इसके बीद दूसरे फेज में प्रोप्रियोसेप्टिव एक्सरसाइज- यानी शरीर की मूवमेंट को पहचानने और कंट्रोल करने की एक्सरसाइज कराई जाएगी.
3. तीसरे फेज में फुल रिकवरी और बॉडी को पहले जैसी स्थिति में लाया जाएगा.
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