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लगभग 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुई इस टक्कर की वजह से चांद पर एक नया और गहरा गड्ढा बन गया है.
एलन मस्क की कंपनी स्पेस-एक्स का एक पुराना और बेकार हो चुका रॉकेट हाल ही (5 अगस्त 2026) में चंद्रमा की सतह से टकराया था. लगभग 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे (5,400 मील प्रति घंटे) की रफ्तार से हुई इस भीषण टक्कर के बाद चांद पर एक नया और गहरा गड्ढा बन गया है. इंसानों द्वारा बनाए गए इस गड्ढे की हैरान कर देने वाली तस्वीरें दक्षिण कोरिया के लूनर स्पेसक्राफ्ट 'दानुरी' ने अपने कैमरे में कैद की हैं.
दक्षिण कोरियाई एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, जब यह रॉकेट चंद्रमा से टकराया, तो उनका दानुरी सैटेलाइट उस जगह के ठीक ऊपर से गुजर रहा था. सैटेलाइट ने उस इलाके के ऊपर से कई बार उड़ान भरी और रॉकेट के टकराने से पहले और टकराने के बाद की बेहद साफ तस्वीरें लीं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जोरदार टक्कर की वजह से चांद पर लगभग 27 मीटर चौड़ा और करीब 5 मीटर गहरा एक नया गड्ढा बन गया है. जारी की गई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जहां रॉकेट गिरा है, वहां एक बड़ा सा काला धब्बा बन गया है. रॉकेट की टक्कर इतनी तेज थी कि चांद की धूल और मलबे की परत चारों तरफ काफी दूर तक फैल गई.
स्पेस एजेंसी ने बताया कि उनका दानुरी सैटेलाइट हादसे से करीब आधा घंटा पहले से ही उस जगह पर नजर बनाए हुए था. सैटेलाइट ने कुल आठ बार तस्वीरें लीं, जिससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि टक्कर के बाद वहां की जमीन में क्या बदलाव आए और धूल कहां तक उड़ी.
Our team at @iaa_csic has captured the impact on the Moon of the upper stage of a Falcon 9 rocket. We attach a preliminary video showing the evolution of the ejected material. The black area corresponds to the lunar disk @SpaceX @JuanLuisRizos @elonmusk @tiempobrasero @A3Noticias… pic.twitter.com/5Ry7hRdCeS
— Jose Maria Madiedo (@jmmadiedo) August 6, 2026
यह रॉकेट असल में जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अंतरिक्ष में भेजा गया था. स्पेस-एक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का काम दो प्राइवेट मून लैंडर्स को चांद की कक्षा तक पहुंचाना था. मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का निचला हिस्सा तो सुरक्षित धरती पर लौट आया, लेकिन इसका ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में ही तैरता रह गया.
कंपनी का इरादा इस हिस्से को चांद से टकराने का बिल्कुल नहीं था. लेकिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और सूरज से निकलने वाली ऊर्जा तरंगों के मिले-जुले असर के कारण यह करीब 4,000 से 4,500 किलोग्राम का रॉकेट धीरे-धीरे चांद की ओर खिंचता चला गया और आखिरकार उससे जा टकराया.
खगोलविदों ने जब अंतरिक्ष में इस 12 मीटर लंबे रॉकेट का असामान्य रास्ता देखा, तब जाकर नासा ने इस बात की पुष्टि की. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब यह भारी-भरकम रॉकेट इतनी तेज रफ्तार से चांद से टकराया, तो उससे लगभग 3 टन टीएनटी विस्फोटक जितना बड़ा धमाका हुआ.
भले ही यह एक अनपेक्षित हादसा था, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह अध्ययन का एक बड़ा जरिया बन गया है. आम तौर पर जब कोई उल्कापिंड या एस्टेरॉयड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों को उसके आकार, वजन और रफ्तार का सही अंदाजा नहीं होता. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों को रॉकेट का कुल वजन, उसकी बनावट और उसकी रफ्तार सब कुछ पहले से पता था.
इससे शोधकर्ताओं को यह गहराई से समझने का मौका मिलेगा कि जब कोई बड़ी चीज इतनी तेज गति से चांद की सतह से टकराती है, तो गड्ढा कैसे बनता है और वहां की मिट्टी व मलबा कितनी दूर तक बिखरता है. अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर भी जल्द ही उस जगह के ऊपर से गुजरेगा और गड्ढे की और ज्यादा बारीक तस्वीरें लेगा.
इसके अलावा स्पेन के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने भी इस टक्कर से उड़े मलबे और धूल के गुबार को दूरबीन के जरिए रिकॉर्ड किया है. इंसानों द्वारा चांद पर जानबूझकर या गलती से किसी चीज को टकराने की यह कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले 2006 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने भी अपने स्मार्ट-1 स्पेसक्राफ्ट को प्रयोग के तौर पर चांद से टकराया था.
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