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दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच बुसान में द्विवार्षिक रक्षा वार्ता (KIDD) आयोजित की जा रही है.जानिए होर्मुज स्ट्रेट और सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों का क्या रुख है.
South Korea US Defense Talks: दक्षिण कोरिया और अमेरिका अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण और नियमित रक्षा वार्ता आयोजित करने जा रहे हैं. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'कोरिया-अमेरिका इंटीग्रेटेड डिफेंस डायलॉग' (KIDD) की यह द्विवार्षिक बैठक बुधवार से शुक्रवार तक दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर बुसान में आयोजित की जाएगी. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दक्षिण कोरिया की सरकार होर्मुज स्ट्रेट में अपनी सैन्य तैनाती के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है.
इस उच्च स्तरीय वार्ता में दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप रक्षा मंत्री (नीति) किम होंग-चोल करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व पूर्वी एशिया मामलों के उप सहायक रक्षा सचिव जॉर्ज लेमूर करेंगे. इन दोनों प्रमुख अधिकारियों के साथ दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रालयों के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि भी बैठक में हिस्सा लेंगे.
यह रक्षा वार्ता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक के दौरान कई प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है. इनमें युद्धकालीन सैन्य संचालन का नियंत्रण (OPCON) दक्षिण कोरिया को वापस सौंपना, दोनों देशों की साझा संयुक्त रक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जहाज निर्माण क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाना शामिल है.
हालांकि दोनों देशों ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि बैठक के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरियाई सेना की संभावित तैनाती का मुद्दा भी उठेगा. दरअसल, अमेरिका काफी समय से दक्षिण कोरिया पर दबाव बना रहा है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा के लिए जारी वैश्विक प्रयासों में शामिल हो.
होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य बल भेजने को लेकर पिछले कुछ समय से हलचल काफी तेज हो गई है. पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए एक विशेष टीम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी थी. इस कदम के बाद से ही यह अटकलें तेज हो गईं कि दक्षिण कोरिया वहां अपनी सेना तैनात करने पर विचार कर रहा है. हालांकि, दक्षिण कोरियाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
दूसरी ओर, इस संभावित तैनाती को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया बेहद सख्त रही है. ईरान ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती की जाती है, तो इसके 'गंभीर परिणाम' भुगतने पड़ सकते हैं.
इस वार्ता का एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा युद्धकालीन सैन्य संचालन नियंत्रण (OPCON) का हस्तांतरण है. दक्षिण कोरिया की लंबे समय से यह कोशिश रही है कि वह अमेरिका से यह अधिकार वापस लेकर अपनी सेना का पूर्ण नियंत्रण स्वयं हासिल करे.
दक्षिण कोरियाई सरकार का लक्ष्य है कि राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के वर्ष 2030 में समाप्त होने वाले पांच वर्षीय कार्यकाल से पहले, या संभव हो तो अगले साल ही, इस हस्तांतरण प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए. इसके लिए दक्षिण कोरिया चाहता है कि संयुक्त सैन्य बलों की 'पूर्ण परिचालन क्षमता' के सत्यापन के दूसरे चरण को जल्द पूरा किया जाए. साथ ही, इस साल शरद ऋतु में होने वाली रक्षा प्रमुखों की बैठक में ओपीकॉन हस्तांतरण का एक निश्चित लक्ष्य वर्ष घोषित किया जाए.
'कोरिया-अमेरिका इंटीग्रेटेड डिफेंस डायलॉग' (KIDD) की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, जो दोनों देशों के बीच रक्षा रणनीतियों पर चर्चा करने का एक प्रमुख मंच है. इस साल यह दूसरी KIDD बैठक है; इससे पहले मई में इसका पिछला सत्र वॉशिंगटन में आयोजित किया गया था.
यह पहली बार है जब KIDD बैठक का आयोजन सोल या वॉशिंगटन से बाहर किसी अन्य शहर में किया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बैठक स्थल के रूप में बुसान शहर को चुनने का मुख्य उद्देश्य जहाज निर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और आपसी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना है.