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क्या फिर लौटने वाले हैं 2011 के काले दिन ? जानिए क्यों सोमाली डाकुओं के लिए वरदान साबित हुआ लाल सागर

लगभग एक दशक की शांति के बाद सोमालिया के समुद्री डाकू हिंद महासागर में फिर से सक्रिय हो गए हैं. जानिए कैसे तकनीक के सहारे वे जहाजों को निशाना बना रहे हैं और भारतीय नौसेना कैसे दे रही है उन्हें करारा जवाब.

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क्या फिर लौटने वाले हैं 2011 के काले दिन ? जानिए क्यों सोमाली डाकुओं के लिए वरदान साबित हुआ लाल सागर

हिंद महासागर में फिर लौटा सोमाली समुद्री डाकुओं का खौफ, AI Photo

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  • सोमालिया के समुद्री डाकू करीब 10 साल की शांति के बाद दोबारा सक्रिय हो रहे हैं.
  • अप्रैल 2026 के अंत से अब तक 8 जहाजों के अपहरण की घटनाएं सामने आई हैं.
  • डाकू अब 'स्टारलिंक' सैटेलाइट नेटवर्क और हमला करने के लिए 'मदरशिप' का उपयोग कर रहे हैं.


Somali Pirates Indian Ocean: हिंद महासागर की लहरों पर एक बार फिर पुराना और खतरनाक संकट मंडराने लगा है. सोमालिया के तट के आसपास कभी पूरी दुनिया के जहाजों के लिए खौफ का पर्याय रहे समुद्री डाकू, लगभग एक दशक की शांति के बाद दोबारा सक्रिय हो गए हैं. अप्रैल 2026 के अंत से लेकर अब तक समुद्र में जहाजों के अपहरण की कई घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है.

क्यों दोबारा पैर पसार रहे हैं समुद्री डाकू?

साल 2011 के आसपास सोमाली समुद्री डकैती अपने चरम पर थी, जहां जहाजों का अपहरण करना और चालक दल को बंधक बनाकर फिरौती वसूलना एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय व्यापार बन गया था. इसके बाद बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त और जहाजों की सख्त सुरक्षा प्रणालियों के कारण इस खतरे को लगभग खत्म कर दिया गया था. लेकिन साल 2026 में हालात फिर से बदलने लगे हैं, लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक संसाधनों पर भारी दबाव आ गया है. कई देशों के युद्धपोत और निगरानी उपकरण अब दूसरे संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा में व्यस्त हैं.

लाल सागर संकट के चलते व्यापारिक जहाजों ने अपने रास्ते बदल दिए हैं, जिससे सोमाली तट और अरब सागर के आसपास समुद्री गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और डाकुओं को नए शिकार मिल रहे हैं.  'द गार्जियन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत से अब तक आठ जहाजों के अपहरण की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं. इससे यह आशंका मजबूत हो गई है कि समुद्री डाकू एक बार फिर संगठित रूप ले रहे हैं.

हाई-टेक हुए आज के समुद्री डाकू

आज के समुद्री डाकू 2010-11 के दौर के अपराधियों की तुलना में कहीं अधिक चालाक और तकनीक से लैस हो चुके हैं, ये डाकू अब केवल छोटी नौकाओं के सहारे हमला नहीं करते. वे पहले किसी बड़े जहाज का अपहरण करते हैं और फिर उसे 'मदरशिप' बनाकर समुद्र में बहुत आगे तक निकल जाते हैं ताकि नए जहाजों की तलाश की जा सके.

इसके अलावा, ये डाकू अब आपस में संपर्क और नेविगेशन के लिए स्पेसएक्स के 'स्टारलिंक' सैटेलाइट इंटरनेट जैसी आधुनिक संचार सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं.

भारतीय नौसेना की बढ़ी मुस्तैदी

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत खुद को केवल अपने जहाजों की सुरक्षा करने वाली सेना के रूप में नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए 'सुरक्षा प्रदाता' के तौर पर स्थापित कर चुका है. भारतीय नौसेना साल 2008 से ही अदन की खाड़ी में डकैतों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है. 1 जुलाई 2026 को अदन की खाड़ी में जिबूती से लगभग 300 समुद्री मील पूर्व-उत्तर-पूर्व में इस व्यापारिक जहाज पर डाकुओं ने हमले की कोशिश की. 

जहाज पर एक भारतीय सहित कुल 21 चालक दल के सदस्य सवार थे. हमले की भनक लगते ही चालक दल ने जहाज के सुरक्षित बख्तरबंद हिस्से यानी 'सिटाडेल' में खुद को बंद कर लिया. भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS Trikand तुरंत सक्रिय हुआ. इसके साथ ही पी-8I समुद्री निगरानी विमान को भी तैनात किया गया. 2 जुलाई को नौसेना की टीम ने जहाज पर पहुंचकर सघन तलाशी ली और सभी को सुरक्षित बचा लिया.

इससे पहले 27 मई 2026 को इस मालवाहक जहाज को डाकुओं ने निशाना बनाने की कोशिश की थी. भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS Kolkata ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की, जिससे घबराकर लुटेरे भाग खड़े हुए और जहाज को सुरक्षित भारतीय समुद्री सीमा से बाहर निकाला गया.

भारत के लिए क्यों बड़ा सिरदर्द है यह संकट?

अरब सागर और अदन की खाड़ी का यह मार्ग भारत के समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. भारत का पश्चिमी तट सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जुड़ा है. यदि सोमाली डाकुओं का खतरा इसी तरह बढ़ता रहा तो समुद्री जहाजों के लिए इंश्योरेंस की लागत बढ़ जाएगी. साथ ही जहाजों को अफ्रीका के चक्कर लगाकर बेहद लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा. जिसकी वजह से माल ढुलाई महंगी हो जाएगी और देश में आवश्यक आयातित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं.
 

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