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पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बायलेट्रेल स्ट्रेटेजिक म्युचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें इस साल अगस्त में तुर्किए को भी शामिल किया गया और अब इसके तीन मेंबर हैं.
सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमले बढ़ते जा रहे हैं. मंगलावर (15 सितंबर, 2026) को मक्का में खतरे का अलर्ट भी जारी किया गया था. सऊदी सरकार कहना था कि इस्लाम के पवित्र शहर मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में हूतियों के ड्रोन को दाखिल होने से पहले ही रोककर नष्ट कर दिया गया. इस बीच पाकिस्तान और तुर्किए की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि वे क्यों सऊदी की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. पिछले महीने ही तीनों ने रक्षा समझौता किया है. समझौते में जो बातें कही गई हैं, उनसे पाकिस्तान पीछे हटता नजर आ रहा है. पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने भी कहा है कि इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं कि मक्का पैक्ट एक्टिवेट हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है. हालांकि, पाकिस्तान सऊदी को हर तरह से मदद कर रहा है. साथ ही उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और ओमान पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि वे कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं.
पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बायलेट्रेल स्ट्रेटेजिक म्युचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें इस साल अगस्त में तुर्किए को भी शामिल किया गया और अब इसके तीन मेंबर हैं. इसे मक्का डिफेंस पैक्ट नाम दिया गया है, जो कहता है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसको बाकी दोनों सदस्य देशों पर भी अटैक माना जाएगा. हालांकि, हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से पैक्ट के दोनों सदस्य पाकिस्तान और तुर्किए दूर नजर आ रहे हैं.
कमर चीमा का दावा है, 'अभी तो पाकिस्तान इंटेलीजेंस, एयरफोर्स और नेवी हर तरह से सऊदी को मदद दे रहा है. सवाल ये है कि हम तो मदद दे रहे हैं, लेकिन जो रीजनल प्लेयर्स हैं, वो क्या कर रहे हैं. मिसाल के तौर पर ओमान क्या कर रहा है, यूएई क्या कर रहा है. ये चीजें बहुत अहमियत रखती हैं.'
कमर चीमा का यह भी कहना है कि पाकिस्तान की सरकार सऊदी के साथ 24x7 कॉन्टेक्ट में है, लेकिन जैसे ही ये सवाल आता है कि क्या डिफेंस एग्रीमेंट के तहत हूतियों के खिलाफ पाकिस्तान सऊदी अरब का साथ देगा, तो इस पर वह गोल-मोल बातें कर रहे हैं. उन्होंने फिर कहा कि जैसे ही मक्का पैक्ट एक्टीवेट होता है, तो इस बात के चांसेज हैं कि पाकिस्तान जाएगा, लेकिन फैसला तो पहले सऊदी को करना होगा. इस बीच पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का कोई क्षेत्रीय मकसद नहीं है. यह पूरी तरह से बचाव के लिए है और इसका उद्देश्य सामूहिक रूप से सुरक्षा और प्रतिरोध सुनिश्चित करना है.
अल-अरबिया इंग्लिश को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर शरीफ चौधरी ने कहा कि आपसी रक्षा प्रतिबद्धताओं को कैसे लागू किया जाएगा, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से बात नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि इस पर तीनों देशों का नेतृत्व आपस में सलाह-मशविरा करेगा और कार्रवाई का सही तरीका तय करेगा और फिर उसे लागू किया जाएगा. उन्होंने भी हूतियों के खिलाफ किसी सैन्य मदद की बात नहीं कही है. पहले पाकिस्तान की सरकार ने भी यही कहा था कि यह पैक्ट रक्षात्मक है. मक्का समझौते का मतलब हूती ठिकानों पर सीधे सैन्य हमला करना नहीं है.
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