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रूस के युद्धाभ्यास से क्यों टेंशन में आया है यूरोप? मामले पर क्या रहेगा NATO का हिसाब किताब?

रूस ने बेलारूस के साथ ज़मीन, समुद्र और हवा में हो रहे सैन्य अभ्यासों के लिए टैंक, युद्धपोत व सुपरसोनिक बमवर्षक तैनात किए हैं. साथ ही, रविवार को बैरेंट्स सागर में एक हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. इसको लेकर यूरोप की चिंता काफी बढ़ गई है, आइए जानते हैं कि इस पर NATO का क्या हिसाब किताब है?

रूस के युद्धाभ्यास से क्यों टेंशन में आया है यूरोप? मामले पर क्या रहेगा NATO का हिसाब किताब?
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हालिया दिनों में रूस कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है. दुनिया की एक बड़ी आबादी ऐसी है, जो यह मानती है कि अब उसने अपने दुश्मनों की लिस्ट का विस्तार कर लिया है. तो क्या वाक़ई ऐसा है? इस प्रश्न के संभावित जवाब तो कई हो सकते हैं. लेकिन जिस तरह रूस नाटो की दहलीज पर खड़ा होकर युद्ध की तैयारी कर रहा है, उसने रूस की राजनीति और रक्षा को समझने वाले तमाम लोगों के कान खड़े कर दिए हैं.
ध्यान रहे कि रूस ने बेलारूस के साथ ज़मीन, समुद्र और हवा में हो रहे सैन्य अभ्यासों के लिए टैंक, युद्धपोत और सुपरसोनिक बमवर्षक तैनात किए हैं और रविवार को बैरेंट्स सागर में एक हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है.

कैसे देख रहे हैं इसे इस पूरे गतिरोध को समझने वाले एक्सपर्ट्स?

इस पूरे प्रकरण पर एक स्वतंत्र बेलारूसी पत्रकार, हन्ना लियुबाकोवा ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है और माना है कि, 'यहां कई रणनीतिक लक्ष्य हैं जिन्हें रूस और बेलारूस हासिल करना चाहते हैं.' 
हन्ना ने यह भी कहा कि दोनों ही डरा रहे हैं. एक दूसरे को दिखा रहे हैं कि हम सक्षम हैं. साथ ही, वे निश्चित रूप से, यह भी देख रहे हैं कि प्रतिक्रिया और उसका जवाब क्या हो सकता है. दिलचस्प ये है कि मामले में अब तक की प्रतिक्रिया, कम से कम कहें तो, ठंडी ही रही है.
ध्यान रहे कि अभ्यास से पहले, पोलैंड ने बेलारूस के साथ अपनी सीमा बंद कर दी और अपने सैन्य अभ्यास के तहत 30,000 से ज़्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया. लिथुआनिया भी अभ्यास कर रहा है और उसने कहा है कि वह रूस और बेलारूस के साथ अपनी सीमाओं पर सुरक्षा मज़बूत करेगा.

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मिन्स्क और मॉस्को के अधिकारी का बयान

मिन्स्क और मॉस्को के अधिकारी ज़ोर देकर कह रहे हैं कि ये अभ्यास रक्षात्मक हैं और किसी अन्य देश के ख़िलाफ़ नहीं हैं. शुक्रवार को, क्रेमलिन ने यूरोप की चिंताओं को 'भावनात्मक अतिरेक' तक बताया, लेकिन जब ये अभ्यास चार साल पहले हुए थे, तो बेलारूस में रूसी सैनिकों की भारी तैनाती हुई थी और इसका इस्तेमाल मॉस्को ने कुछ महीने बाद यूक्रेन पर अपने आक्रमण के लिए किया था. आपको बता दें कि यूरोप सिर्फ़ इन अभ्यासों को लेकर ही चिंतित नहीं है.
गौरतलब है कि यह शक्ति प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है, जब हाल ही में नाटो के हवाई क्षेत्र में रूसी ड्रोन घुसपैठ (पहले पोलैंड और फिर रोमानिया में) के बाद तनाव बढ़ गया है. बहरहाल, पश्चिम में यह धारणा है कि ड्रोन और अभ्यास नाटो की सुरक्षा और पश्चिमी संकल्प की परीक्षा हैं.
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