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लंदन में बोले राहुल गांधी, भारत का नेता कैम्ब्रिज, हार्वर्ड में भाषण दे सकता है लेकिन भारतीय यूनिवर्सिटी में नहीं

Rahul Gandhi in London: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि भारत में नफरत का माहौल बना दिया गया है.

लंदन में बोले राहुल गांधी, भारत का नेता कैम्ब्रिज, हार्वर्ड में भाषण दे सकता है लेकिन भारतीय यूनिवर्सिटी में नहीं

Rahul Gandhi

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डीएनए हिंदी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इन दिनों लंदन में हैं. रविवार को उन्होंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (Indian Overseas Congress) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों से बात की. इस बातचीत में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा माहौल बन गया है कि एक भारतीय राजनेता कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में लेक्चर दे सकता है लेकिन वह भारत की किसी यूनिवर्सिटी में नहीं बोल सकता है. मोदी सरकार पर नफरत को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह शर्मनाक है,

राहुल गांधी ने कहा, 'जितना वह मेरे ऊपर हमला करेंगे, मेरे लिए उतना अच्छा होगा, क्योंकि मैं (उन्हें) उतना बेहतर समझ पाउंगा. यह साहस और कायरता के बीच की लड़ाई है. यह सम्मान और अपमान के बीच की लड़ाई है. यह लड़ाई प्रेम और घृणा के बीच है. जैसा कि मैंने यात्रा के दौरान कहा था कि नफरत के बाजार में, हम मोहब्बत की दुकान खोलने आए हैं.

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राहुल बोले- यह शर्मनाक है लेकिन सच यही है
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें कैंब्रिज में लेक्चर देने के लिए बुलाया गया है. उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि भारतीय राजनेता भारत के विश्वविद्यालयों में यूं खुलकर अपने विचार नहीं रख सकते हैं. 'एकता, विविधता और समावेश' की थीम पर आयोजित सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोगों के जिंदाबाद के नारों के बीच राहुल गांधी ने कहा, 'अच्छा माहौल था (कैंब्रिज विश्वविद्यालय में) और उसने मुझे सोचने पर विवश कर दिया कि एक भारतीय राजनेता कैंब्रिज विश्वविद्यालय, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में लेक्चर दे सकता है, लेकिन वह भारत के किसी विश्वविद्यालय में नहीं बोल सकता है.'

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कांग्रेस सांसद ने कहा, 'कारण सिर्फ इतना है कि हमारी सरकार विपक्ष के किसी विचार, विपक्ष के किसी सिद्धांत पर चर्चा नहीं होने देती है. संसद भवन में भी यही होता है, जब भी हमें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलना होता है, जैसे नोटबंदी, जीएसटी, यह तथ्य कि चीनी हमारी सीमा के भीतर घुसकर बैठे हैं. हमें इन्हें (इन मुद्दों को) सदन में उठाने नहीं दिया जाता है. यह शर्मनाक है लेकिन सच है और यह वह भारत नहीं है, जिसकी हम सभी को आदत है. हमारा देश एक मुक्त देश है, ऐसा देश है जहां हम अपनी बुद्धिमत्ता पर गर्व करते हैं, एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं, एक-दूसरे की सुनते हैं लेकिन इस माहौल को बर्बाद कर दिया गया है.'

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