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गाजा में Parle-G बना 'जीवन रेखा', 5 रुपये वाली बिस्कुट पहुंची ₹2,400 के पार, बद से बदतर होते जा रहे हालात

Gaza Crisis: युद्ध और भूख की मार झेल रहे गाजा में आम बिस्कुट भी लग्जरी आइटम बन चुके हैं, पांच रुपए वाला पारले-जी अब हजारों में बिक रहा है. गाजा की मौजूदा हालत केवल युद्ध की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह मानवीय संकट की चरम सीमा है.

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गाजा में Parle-G बना 'जीवन रेखा', 5 रुपये वाली बिस्कुट पहुंची ₹2,400 के पार, बद से बदतर होते जा रहे हालात

Gaza crisis (Image X)

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Gaza Crisis: एक समय जहां गाजा पट्टी में बच्चे हंसते-खेलते थे, आज वहां चारो ओर भूख, तबाही और मौत का मंजर पसरा हुआ है. इज़रायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध ने गाजा को पूरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है. पिछले कुछ महीनों से जारी हिंसा के कारण गाजा में न सिर्फ लोगों की जान पर बन आई है, बल्कि खाने-पीने की चीजों की भारी किल्लत भी हो गई है. हालात इतने खराब हैं कि जो बिस्किट भारत में मात्र पांच रुपए में मिल जाता है, वही गाजा में ₹2,300 से ज्यादा में बिक रहा है. 

जीवन की आशा बिस्किट

गाजा से आई एक वायरल पोस्ट ने सबको चौंका दिया है. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसे आखिरकार अपने बेटे के लिए पारले-जी बिस्किट मिला, जिसकी कीमत 24 यूरो (करीब ₹2,342) चुकानी पड़ी. यही बिस्किट भारत में मात्र ₹5 में मिलता है. पोस्ट में लिखा गया कि पहले इसकी कीमत 1.5 यूरो थी जो अब कई गुना बढ़ गई है. यह उस बात का जीता जागता उदाहरण है कि वहां की आम जनता को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 


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भोजन से ज्यादा महंगी जरूरतें

गाजा में अब रोजमर्रा की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. 1 किलो चीनी ₹4,914 में बिक रही है, वहीं आलू ₹1,965 प्रति किलो तक पहुंच गया है.इसके अलावा वहां सहायता सामग्री की भी कालाबाजारी खूब हो रही है और जरूरतमंदों को उनका हक नहीं मिल पा रहा. मानवीय सहायता के ट्रकों की संख्या बेहद सीमित है और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद आपूर्ति नहीं हो पा रही है. बहरहाल, गाजा की मौजूदा हालत केवल युद्ध की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह मानवीय संकट की चरम सीमा है. जब पारले-जी बिस्किट जैसी मामूली चीज भी लोगों की उम्मीद बन जाए, तो समझिए हालात कितने गंभीर हैं. 

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