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सऊदी के बाद अब तुर्किए को भी लाया साथ, पाकिस्तान क्यों बनाना चाहता है मुस्लिम NATO? 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह समझौता किसी भी प्रकार की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है और इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.

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सऊदी के बाद अब तुर्किए को भी लाया साथ, पाकिस्तान क्यों बनाना चाहता है मुस्लिम NATO? 

मुस्लिम नाटो तैयार करेगा पाकिस्तान?

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  • पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
  • इन तीनों में से किसी भी एक पर हमला सब पर हमला माना जाएगा.
  • पाकिस्तान काफी समय से मुस्लिम नाटो की वकालत करता रहा है. 

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान अपने मुस्लिम नाटो वाले मंसूबों को पूरा करने में जुटा हुआ है. उसने सऊदी अरब के साथ मिलकर अब तुर्किए के साथ सुरक्षा समझौता किया है, जिसके तहत तीनों में से किसी भी एक देश पर हमला, उन सभी देशों पर हमला माना जाएगा. इस पैक्ट को 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' नाम दिया गया है.  

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'यह समझौता किसी भी प्रकार की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है और इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. इसके अलावा, यह तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बढ़ाने का भी प्रावधान करता है.'

शहबाज, MBS, एर्दोगन की मीटिंग के बाद हुए हस्ताक्षर

सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई बैठक के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते में तेल समृद्ध सऊदी अरब और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्किए भी शामिल है, जिसके पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना और तेजी से बढ़ती डिफेंस इंडस्ट्री है.

पाकिस्तान क्यों चाहता है मुस्लिम नाटो?
 
-पाकिस्तान चाहता है कि इस्लामी दुनिया में उसकी भूमिका एक प्रमुख सैन्य और राजनीतिक शक्ति के रूप में बनी रहे.
-इस्लामाबाद लंबे समय से चाहता है कि मुस्लिम देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके कश्मीर के मामले में उसका समर्थन करें. हालांकि, सभी मुस्लिम देशों का रुख एक जैसा नहीं रहा है और कई देशों ने भारत के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखे हैं.
-पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों के इन्वेस्टमेंट, लोन और वहां काम करने वाले पाकिस्तानियों की भेजे गए रुपयों पर निर्भर है. इसलिए इन देशों के साथ वो अच्छे संबंध चाहता है.
-आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए पाकिस्तान बहुपक्षीय मंचों का समर्थन करता है.
-पाकिस्तान अकसर यूरोपीय देशों के सैन्य संगठन नाटो की दुहाई देकर मुस्लिम नाटो की वकालत करता रहा है. वो इजरायल और भारत को अपना दुश्मन बताता है.
  
पाकिस्तान के पास कौन-कौन हथियार?

पाकिस्तान की सेना के पास कई आधुनिक हथियार हैं, जिनमें से ज्यादातर उसने चीन के साथ संयुक्त रूप से विकसित किए हैं या फिर चीन से खरीदे हैं.
 
1- लड़ाकू विमान
J-10C:  पाकिस्तान का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है. इसमें AESA रडार और लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं.
JF-17 थंडरः पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है. यह पाकिस्तान वायुसेना की रीढ़ बनता जा रहा है.
F-16: पाकिस्तान से ये फाइटर जेट अमेरिका से लिया है, जिन्हें आधुनिक हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से लैस किया गया है.

2- क्रूज मिसाइलें
शाहीन मिसाइल:  करीब 2,750 किमी तक मार करने में सक्षम बताई जाती है.
अबाबील: पाकिस्तान का दावा है कि इसमें MIRV तकनीक विकसित की जा रही है.
बाबर:  जमीन और समुद्र से दागी जा सकती है.
3- एयर डिफेंस सिस्टम
पाकिस्तान चीन से लिया गया एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 का इस्तेमाल करता है, जिसे भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह कर दिया था.
4- परमाणु क्षमता 
5- टैंक
VT-4:  पाकिस्तान के सबसे आधुनिक टैंकों में से एक.
Al-Khalid:  चीन के सहयोग से विकसित.
6- पाकिस्तान नेवी के पास Type 054A/P  आधुनिक फ्रिगेट है. इसके अलावा हेंगोर क्लास सबमरीन चीन के सहयोग से विकसित हो रही है.
 
सऊदी अरब के पास कौन से मॉडर्न हथियार?
 
1-लड़ाकू विमान

F-15: सऊदी वायुसेना का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान, जिसे अमेरिका से खरीदा था.
यूरोफाइटर टाइफून: यूरोप द्वारा विकसित किया गया आधुनिक रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस फाइटर जेट है. 

2- वायु रक्षा
पेट्रियट: अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम है, बैलिस्टिक मिसाइलों और फाइटर जेट्स को मार गिराता है. 
THAAD: लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे अमेरिका से खरीदा है.

3- टैंक
M1A2S Abrams: सऊदी ने इसे अमेरिका से खरीदा है. 
 
4- सऊदी रॉयल नेवी के पास मल्टी मिशन सरफेस कॉम्बेटेंट मॉडर्न युद्धपोत है. इसके अलावा मॉडर्न मिसाइल लैस नौकाएं और हेलिकॉप्टर हैं. 
5- चीन से खरीदे गए ड्रोन हैं
 
 

तुर्किए के पास कौन से आधुनिक हथियार?

1-लड़ाकू विमान

F-16: तुर्किए ने ये फाइटर जेट्स अमेरिका से खरीदे थे.
KAAN: तुर्किए का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान, अभी विकास और परीक्षण चरण में है.

2- ड्रोन
Bayraktar TB2:  दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रोन में शामिल.
Bayraktar Akıncı: भारी हथियार ले जाने में सक्षम है.
Anka: निगरानी और हमले दोनों के लिए.

3- टैंक
Altay:  तुर्किए का स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक है.

4- वायु रक्षा
SIPER: तुर्किए के पास खुद की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है.

5- तुर्किए की नेवी के पास एक ऐसा युद्धपोत है, जिस पर ड्रोन भी संचालित किए जा सकते हैं. 
 
6- तुर्किए के पास Atmaca और Bora मिसाइलें हैं. 
 

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