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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जिन मेटियोर मिसाइलें से लैस था, उनकी स्पीड मैक-4 यानी आवाज की स्पीड से 4 गुना ज्यादा थी. इसका 'नो एस्केप जोन' 60 किमी से अधिक है, जोकि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली AIM-120 AMRAAM की तुलना में तीन गुना ज्यादा है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के राफेल फाइटर जेट्स को मार गिराने का दावा किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस दावे को आए दिन रिपीट करते रहते हैं, हालांकि वो ये नहीं बताते कि किस देश के फाइटर जेट गिरे थे. अब पाकिस्तान के ही डिफेंस एक्सपर्ट ने शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के उन दावों की पोल खोलकर रख दी है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब राफेल फाइटर जेट मिसाइलें दाग रहा था तो डर की वजह से पाकिस्तानी वायुसेना ने F-16 फाइटर जेट्स को उड़ाया तक नहीं था. PAF अधिकारियों को डर था कि ये महंगे फाइटर जेट कहीं राफेल की दागी मिसाइलों का टारगेट ना बन जाएं.
PAF ने क्यों नहीं उड़ाए थे F-16?
पाकिस्तान वायु सेना के रिटायर्ड एयर कमोडोर खालिद चिश्ती ने कबूल करते हुए कहा कि PAF के F-16 फाइटर जेट्स की बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) मिसाइलों की क्षमता इतनी कम थी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसका बेड़ा उड़ान तक नहीं भर सका. उन्होंने कहा, 'PAF के F-16 फाइटर जेट्स AIM-120 AMRAAM मिसाइलों से लैस थे, जिनकी मारक क्षमता करीब 100 किलोमीटर तक थी. यह भारतीय वायु सेना के राफेल विमानों पर लगी मेटियोर मिसाइलों की 200 किलोमीटर की रेंज से बहुत कम थी. इस वजह से पाकिस्तान एयरफोर्स ने फैसला किया कि आसमान में अपने F-16 फाइटर जेट्स को तैनात करना बेहद खतरनाक था.'
राफेल के सामने नहीं टिक पाए पाकिस्तान के F-16
चिश्ती के अनुसार, पाकिस्तान एयरफोर्स के पास अपने कीमती F-16 फाइटर जेट्स को सुरक्षित रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि भारतीय राफेल विमानों के साथ एकतरफा हवाई युद्ध में उन्हें जोखिम में डालना ठीक नहीं था. हालांकि F-16 फाइटर जेट्स को पाकिस्तान वायुसेना की रीढ़ रहा माना जाता रहा है, लेकिन राफेल के मॉडर्न अपग्रेडेड एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार और डेटा इंटीग्रेशन के सामने यह पूरी तरह से कमजोर साबित हुआ.
राफेल में तैनात मेटियोर मिसाइल की क्षमता कितनी?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल जिन मेटियोर मिसाइलें से लैस था, उनकी स्पीड मैक-4 यानी आवाज की स्पीड से 4 गुना ज्यादा थी. इसका 'नो एस्केप जोन' 60 किमी से अधिक है, जोकि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली AIM-120 AMRAAM की तुलना में तीन गुना ज्यादा है. नो एस्केप जोन का मतलब होता है- मिसाइल की ऐसी इंगेजमेंट जियोमेट्री, जिसमें टारगेट के पास मिसाइल से बचने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता है. इसी अपग्रेडेड सिस्टम ने भारतीय राफेल को जवाबी हमले की पहुंच से सुरक्षित रखते हुए आसानी से टारगेट को तबाह करने में सक्षम बनाया.
पाकिस्तान के लिए कड़वा घूंट है ये कबूलनामा
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कबूलनामा पाकिस्तान के लिए एक कड़वा घूंट है, जिसने दशकों तक अमेरिकी F-16 फाइटर जेट्स के स्क्वाड्रनों को खरीदने और उनके रखरखाव पर भारी खर्च किया है. हालांकि पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से J-10CE फाइटर जेट भी खरीदे हैं, जो लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली PL-15 मिसाइलों से लैस हैं, लेकिन F-16 के आसमान तक नहीं उड़ पाने से पाकिस्तान की डींगे हांकने की पोल खोल गई है.
ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हो गया पाकिस्तान!
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, जिसके बाद हवाई युद्ध हुआ और फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैन्य ढांचे पर सटीक हमले किए. इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस, सरगोधा के मुशाफ एयरबेस, रहीम यार खान एयरबेस, सिंध के भोलारी एयरबेस और जैकबाबाद एयरबेस पर मिसाइलें दागी थीं. इस दौरान पाकिस्तान के F-16, JF-17 जैसे फाइटर जेट, AEW&C जैसे अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम भी तबाह हुए थे, जिसकी वजह से उसका कम्युनिकेशन नेटवर्क बुरी तरह पंगु हो गया.
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