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Pakistan Ahmadi Muslim: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कहानी पुरानी है. रजमान के महीने में भी अहमदिया मुसलमानों के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आ रही है.
पाकिस्तान (Pakistan) में अहमदिया मुसलमानों के साथ भेदभाव कोई नई बात नहीं है. रमजान के महीने में भी पुलिस और प्रशासन इनके साथ बदसलूकी करने से बाज नहीं आ रहा है. इस समुदाय के 45 लोगों को नमाज पढ़ने के दौरान पुलिस उठाकर ले गई है. दो अलग-अलग जगहों से इन लोगों को पुलिस उठाकर ले गई है. बताया जा रहा है कि इन सभी लोगों को मस्जिद में नमाज पढ़ने के दौरान हिरासत में लिया गया है. पाकिस्तान के कानून में अहमदिया समुदाय को मुसलमान का दर्जा नहीं दिया गया है. इन्हें मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है. हालांकि, यह समुदाय दशकों से देश में रह रहा है और इस्लाम धर्म को मानने की बात करता है.
अहमदिया समुदाय के लोग हमेशा से खुद को मुस्लिम मानते हैं और इस्लामिक धार्मिक परंपराओं का ही पालन करते हैं. हालांकि, पाकिस्तान ने 1974 में कानून बनाकर इस समुदाय के लोगों को खुद को मुसलमान मानने या कहने पर भी पाबंदी लगा दी है. अहमदिया समुदाय के लोगों पर पाकिस्तान में कई तरह के धार्मिक प्रतिबंध लागू हैं. इस समुदाय के लोग न तो सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ सकते हैं, न इन्हें मस्जिदों में जाने की अनुमति है. गुंबद, मीनार और मेहराबों पर इन्हें कुछ भी बनाने या कुरान की आयतें सार्वजनिक तौर पर लिखन की मनाही है. अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड हमेशा ही शर्मनाक रहा है.
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कराची पुलिस ने बताया कि 25 अहमदिया लोगों को सुरजानी के शहरी इलाके से हिरासत में लिया गया है. 20 और अहमदिया लोगों को भी दूसरी जगह से हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि ये लोग जब मस्जिद में थे, तो कुछ स्थानीय लोगों ने इन्हें घेर लिया. स्थानीय लोगों ने इनके खिलाफ नारेबाजी की और उनका विरोध था कि सार्वजनिक जगह पर इन्हें नमाज करने का अधिकार नहीं है. समुदाय के लोगों पर संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से इन्हें हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि विरोध करने वाले लोग तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) से जुड़े हुए हैं.
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