दुनिया
पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा कि सरकार ने कोर्ट का पूरा आदेश पढ़ा है और हमने इस पर विचार किया कि क्या इमरान का इलाज सरकारी अस्पताल में करवाया जाना चाहिए.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख और पूर्व पीएम इमरान खान को अस्पताल में शिफ्ट किए जाने के फैसले के बाद शहबाज शरीफ सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है. पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी कि इमरान खान को किसी प्राइवेट हॉस्पिटल के बजाय सरकारी अस्पताल में ही शिफ्ट किया जाए.
पाकिस्तानी न्यूज चैनल समा टीवी के अनुसार आजम नजीर तरार ने कहा कि सरकार ने कोर्ट का पूरा आदेश पढ़ा है और हमने इस पर विचार किया कि क्या इमरान का इलाज सरकारी अस्पताल में करवाया जाना चाहिए. आदेश के दूसरे मुद्दों पर भी हमने विचार किया है. पाकिस्तानी कानून मंत्री का यह भी कहना है कि पहले भी सजा काट रहे कई कैदियों का सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया गया है.
मंगलवार (18 अगस्त, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने आंखों की रोशनी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्यों को लेकर परिवार की चिंता को देखते हुए इमरान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था. जस्टिस शाहिद वहीद ने सात पन्नों के आदेश में पूर्व पाक पीएम की हेल्थ लेकर चिंता जताई है.
तोशखाना, अल कादिर ट्रस्ट केस से जुड़े अलग-अलग मामलों में इमरान खान जेल में सजा काट रहे हैं. उन पर कुल 189 मुकदमे चल रहे हैं और अलग-अलग मामलों में उन्हें सजाएं भी सुनाई गई हैं. साल 2022 में देश में बढ़ती महंगाई के चलते विपक्ष उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया, जिसमें वह हार गए. प्रधानमंत्री का पद छोड़ते ही उनकी पूरी जिंदगी पलट गई. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें निचली अदालत से हाईकोर्ट तक सजाएं सुनाई गईं. 2023 में वह पहली बार अल कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार केस में जेल गए थे, इसके बाद अलग-अलग मामलों की कार्यवाही के चलते वह जेल से बाहर नहीं आ सके
अल कादिर ट्रस्ट मामला 190 मिलियन पाउंड के घाटाले से जुड़ा है. इस मामले में आरोप लगे थे कि प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान की पत्नी बुशरा बीबी ने पीटीआई के कुछ नेताओं के साथ मिलकर अल कादिर ट्रस्ट बनाया, जिसका मकसद यूनिवर्सिटी की स्थापना करना था. आरोप है कि ट्रस्ट के तहत एक रेजिडेंशियल कॉम्पलेक्स की जमीन हड़पी गई, साथ ही राष्ट्रीय खजाने को भी 190 मिलियन पाउंड का नुकसान हुआ.
नौ मई, 2023 को इस मामले में सुनवाई के लिए जब इमरान खान इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचे तो वहां नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो और पाक रेंजर्स ने पेशी से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इससे पीटीआई समर्थक भड़क गए और उन्होंने पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन किए जो बाद में हिंसात्मक प्रदर्शनों में बदल गए. सुप्रीम कोर्ट ने भी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया और दो दिन बाद ही इमरान जेल से बाहर आ गए.
अभी जेल से बाहर आए 24 दिन ही हुए थे कि तोशखाना मामले में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दे दिया और तीन साल की सुनाई गई. 5 अगस्त, 2023 को इमरान खान को फिर से जेल भेजा गया और तब से वह बाहर नहीं आ सके हैं. परिवार का तो यह तक कहना है कि पीटीआई के नेताओं, वकील, बहनों, बीवी और बच्चों तक से उनको मिलने नहीं दिया जाता. नौ महीने पहले भारी प्रदर्शन के बाद अलीमा खान को भाई से मिलने की इजाजत मिली थी. आज दूसरी बहन नूरीन नाजिया की इमरान से मुलाकात हुई है.
तोशखाना मामले में 2024 में इमरान और बुशरा बीबी को 14-14 साल की जेल हुई थी. फिर 2025 के जनवरी में अल कादिर ट्रस्ट केस में इमरान को 14 साल और बुशरा बीबी को सात साल, जबकि दिसंबर में तोशखाना-2 मामले में पति-पत्नी 17-17 साल की सजा सुनाई गई.
तोशखाना मामले में दोनों पर आरोप हैं कि प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए इमरान खान ने विदेश से मिले महंगे तोहफों की जानकारी चुनावी घोषणा में छिपाई. सऊदी अरब से भी इमरान और बुशरा बीबी को महंगी घड़ियां, गोल्ड और डायमंड ज्वेलरी मिलीं, जिन्हें उन्होंने सरकारी नियमों के अनुसार अपने पास रखने के बाद बेच दिया.
इमरान खान को राज्य-गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में भी 10 साल की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा बुशरा बीबी से शादी करने को लेकर इद्दत मामले में भी उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई थी. इस मामले में उन पर आरोप था कि पहले पति से तलाक के बाद इद्दत की अवधि पूरी किए बिना ही दोनों ने शादी कर ली. बुशरा बीबी को भी इस केस में सात साल की जेल हुई थी. हालांकि, बाद में दोनों को इस मामले में राहत मिल गई थी. इस्लाम के अनुसार मुस्लिम महिला को तलाक के बाद 130 दिन की इद्दत की अवधि पूरी करनी होती है. इस दौरान वह किसी और पुरुष से निकाह नहीं कर सकती है.