दुनिया
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रणनीति से प्रेरित होकर पाकिस्तान ने बिलावल भुट्टो को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति का संदेश देने भेजने का फैसला किया है, जिससे वह अपनी छवि सुधार सके.
भारत की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति और हालिया ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने अब फिर भारत की नकल करने की रणनीति अपनाई है. भारत द्वारा अपने सांसदों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भेजकर आतंकवाद के खिलाफ सबूत पेश करने की मुहिम के बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी को एक कूटनीतिक ‘शांति मिशन’ की जिम्मेदारी सौंपी है. ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब 7 से 10 मई के बीच चले चार दिवसीय सैन्य टकराव में पाकिस्तान को भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. भारत के कड़े रुख के बाद पाकिस्तान अब खुद को वैश्विक मंच पर ‘शांति प्रिय’ देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है.
भारत की ओर से आतंकी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट संदेश देने के लिए सांसदों की टीम को भेजने की रणनीति के बाद पाकिस्तान ने अब बिलावल भुट्टो ज़रदारी को आगे कर दिया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बिलावल से संपर्क कर उन्हें आग्रह किया कि वो पाकिस्तान का 'शांति का केस' दुनिया के सामने रखें.
बिलावल भुट्टो ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, 'प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आज मुझसे संपर्क किया और आग्रह किया कि मैं एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करूं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का पक्ष रखूं. मैं इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं और इन कठिन समयों में पाकिस्तान की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं.
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इस फैसले को भारत की रणनीति की नकल माना जा रहा है, जिसमें भारत सरकार ने 7 प्रमुख सांसदों व राजनयिकों को अमेरिका, यूरोप और वेस्ट एशिया भेजने का निर्णय लिया है. इन नेताओं में शशि थरूर, रवि शंकर प्रसाद, गुलाम नबी आजाद और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नाम शामिल हैं. ये सभी प्रतिनिधिमंडल भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति और पहलगाम हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी साझा करेंगे.
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