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पाकिस्तानी दूतावास ने सऊदी अरब जाने वाले अपने ही नागरिकों को चेतावनी दी है कि अगर कोई भीख मांगता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. इसके पीछे की वजह सऊदी अरब में भीख मांगने से लेकर जेबकतरों में पकड़े जाने वाले आरोपियों में सबसे ज्यादा संख्या पाकिस्तानी नागरिकों की है.
क्या कोई देश अपनी ही जनता से यह अपील करने पर मजबूर हो सकता है कि 'विदेश जाकर भीख मत मांगो', हाल ही में ऐसा पाकिस्तान को करना पड़ा है. उनकी आर्थिक बदहाली और सामाजिक संकट के दबाव के बीच पाकिस्तान सरकार को सऊदी अरब में उमराह के लिए जाने वाले नागरिकों से यह अपील की गई. पाकिस्तानी सरकार ने कहा कि पवित्र 'उमराह' यात्रा के नाम पर सऊदी अरब जाने वाले कई पाकिस्तानी नागरिक वहां वीजा नियमों का उल्लंघन कर भीख मांगते पकड़े जा रहे हैं. इसकी वजह से पूरे मुल्क की फजीहत हो रही है. इसे रोकने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने नागरिकों को चेतावनी दी कि अगर ऐसा करते हुए कोई नागरिक पकड़ा गया तो सख्त कार्रवाई होगी.
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने हाल ही में अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है कि उमराह के वीजा पर सऊदी अरब जाकर भीख मांगने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. इसकी वजह सऊदी सरकार द्वारा अपनी जेलों में बंद ऐसे हजारों पाकिस्तानियों का डेटा साझा कर इस्लामाबाद पर कड़ा दबाव बनाना है. सऊदी अरब के कड़े कानूनों और निर्वासन की चेतावनियों के बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर भीख मांगने का गिरोह चला रहे हैं.
पाकिस्तानी दूतावास में पाकिस्तानी नागरिकों को चेतावनी दी कि अगर कोई भीख मांगता पकड़ा गया तो सख्त कार्रवाई होगी. किसी तरह का कोई रहम नहीं बरता जाएगा. मक्का मदीना में इबादत के लिए आये. अगर यहां कोई भीख मांगता पकड़ा जाता है तो उस पर न सिर्फ जुर्माना लगाया जाएगा. बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ेगी. साथ ही आरोपी व्यक्ति को सीधे पाकिस्तान डिपोर्ट कर जेल भेज दिया जाएगा. आरोपी दोबारा सऊदी में कदम नहीं रख पाएगा. उसे हमेशा के लिए बैन कर दिया जाएगा. इसके साथ ही वीजा पर जितने समय के लिए आप गये हैं. उसी समय में पाकिस्तान में वापसी कर लें. उससे ज्यादा रुकने पर सीधा जेल जाना पड़ेगा.
पाकिस्तान दूतावास के चेतावनी देने की वजह सऊदी अरब में भिखारियों का सबसे बड़ा जमावड़ा पाकिस्तानियों का लगना है. सितंबर 2023 में पाकिस्तान की सीनेट की एक समिति को बताया गया था कि विदेशों में गिरफ्तार किए गये भिखारियों में 90 प्रतिशत पाकिस्तानी हैं. वहीं उमराह हज या जियारत के लिए वीजा लेकर सऊदी अरब, इराक और अन्य देशों में जाकर पाकिस्तानी नागरिक भीख मांगने लगते हैं. इतना ही नहीं दावा किया गया कि मक्का की मस्जिद अल हरम में पकड़े गये जेबकतरों में ज्यादातर की पहचान पाकिस्तानी नागरिकों के रूप में हुई.
इस खबर का सबसे बड़ा और चिंताजनक पहलू यह है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत मजबूरी नहीं, बल्कि एक संगठित 'माफिया' का रूप ले चुका है. पाकिस्तान में जारी रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, आसमान छूती बेरोजगारी और रुपये के गिरते मूल्य ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है, जब देश के अंदर गुजारा मुश्किल हो गया, तो कई लोगों को फर्जी ट्रेवल एजेंटों ने 'धार्मिक यात्रा के बहाने सऊदी में कमाई' का सपना दिखाकर इस धंधे में धकेल दिया. इसको लेकर जांच चल रही हैं.
दुनिया भर के दूतावास अब पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को बेहद शक की निगाह से देखने लगे हैं, जिससे आम लोगों के वीजा खारिज हो रहे हैं. कभी खाड़ी देशों में पाकिस्तानी लेबर और प्रोफेशनल्स की भारी मांग थी, लेकिन इस तरह की घटनाओं से उनकी सामाजिक साख पूरी तरह ध्वस्त हो गई है.