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पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी है. जिसके बाद पाकिस्तान में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. जिसके बाद अबतक पाकिस्तान कि सरकार ने भारत को पत्र लिखे जा रहा है.
2 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को सीधा संदेश देते हुए सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. भारत ने साफ किया कि आतंकवाद और आपसी समझौते एक साथ नहीं चल सकते. इस निर्णय के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है. पड़ोसी देश न केवल पानी की किल्लत से जूझ रहा है बल्कि भारत से संधि को पुनः बहाल करने की गुहार लगाते हुए चार पत्र भी भेज चुका है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद स्पष्ट रूप से कहा था कि ट्रेड और टेरर एक साथ नहीं चल सकतीं. इसी के तहत जलशक्ति मंत्रालय की सचिव देवश्री मुखर्जी ने 24 अप्रैल को पाकिस्तान को पत्र भेजकर सिंधु जल संधि को तकनीकी और रणनीतिक कारणों से रोकने की घोषणा की थी.
दरअसल, सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सचिव सईद अली मुर्तजा ने मई के पहले सप्ताह से लेकर अब तक भारत को चार पत्र लिख चुके हैं. इन पत्रों में फिर से संधि बहाल करने की अपील की गई है. सभी पत्रों को भारत के जलशक्ति मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को भेज दिया है, लेकिन भारत अभी भी अपने फैसले पर कायम है.
भारत सरकार ने सिंधु नदी के जल का उपयोग बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं की शुरुआत कर दी है. आपको बता दें ब्यास नदी से 130 किलोमीटर की नहर गंगनहर से जोड़ी जा रही है. इसके अलावा भी कई नहर प्रस्तावित है, जिसमें 12 किलोमीटर की सुरंग भी शामिल है. इससे दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों को सीधा लाभ मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में रबी की फसल पर इसका सीधा असर होगा. इसके अलावा, पीने के पानी की भी गंभीर किल्लत पाकिस्तान में खड़ी हो सकती है. इस जल संकट से देश की आंतरिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है. बहरहाल, भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि जब तक आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार की रियायत की उम्मीद न रखे. सिंधु जल संधि की यह सख्ती अब राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का हिस्सा बन चुकी है.
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