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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोहियों ने सेना और सरकार की नाक में दम कर दिया है. इस इलाके में स्थित पाकिस्तान की सबसे बड़ी खदान का काम भी बिगड़ते हालात के कारण प्रभावित हो रहा है. खदान बंद हुई तो पाकिस्तान को तगड़ा आर्थिक झटका लगेगा.
पाकिस्तान के अंदरूनी हालात इस समय बेहद बुरे हैं. अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था के कारण देश को गंभीर आर्थिक चोट भी लग रही है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी चालू कॉपर और गोल्ड माइन के एक महीने के भीतर बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. माइनिंग डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में इस गंभीर खतरे के बारे में बताया गया है.
Mining.com की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को भेजे गए एक पत्र में चेतावनी दी गई है कि बलूचिस्तान में विद्रोहियों की कार्रवाई के कारण सैंदक कॉपर-गोल्ड माइन का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इसमें कहा गया है कि अगर सुरक्षा हालात में सुधार नहीं हुआ, तो उत्पादन रुकने की आशंका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, बुनियादी ढांचे और विदेशी प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाने वाले विद्रोही हमलों में बढ़ोतरी के बीच सड़क परिवहन असुरक्षित होता जा रहा है. यही खदान के लिए सप्लाई का मुख्य रास्ता है.
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा है कि प्रांतीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को माइनिंग से जुड़ी जगहों, कर्मचारियों, लॉजिस्टिक्स और परिवहन के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.
बता दें कि खनिज संपदा से भरपूर बलूचिस्तान में स्थित सैंदक खदान का संचालन 2001 से चीन की सरकारी कंपनी 'मेटालर्जिकल कॉरपोरेशन ऑफ चाइना' कर रही है. यह संचालन 2037 तक चलने वाले एक लीज़ समझौते के तहत हो रहा है. इस खदान से निकलने वाले ज़्यादातर तांबे और सोने का निर्यात चीन को किया जाता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले साल इस खदान से तांबे के निर्यात से पाकिस्तान को लगभग 750 मिलियन डॉलर की कमाई हुई.
चीन ने पाकिस्तान में 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया है. इसमें बलूचिस्तान में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं. बलोच विद्रोही अपने इलाके चीन की मौजूदगी को पसंद नहीं करते. बलोच लिबरेशन आर्मी ने इस क्षेत्र में काम करने वाले चीनी इंजीनियरों और और संपत्तियों पर बार-बार हमले किए हैं. इससे चीन की चिंता भी बढ़ रही है. चीन ने पाकिस्तान पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए दबाव डालना भी शुरू कर दिया है. सुरक्षा चिंताओं ने बैरिक माइनिंग के प्रस्तावित 9 बिलियन डॉलर के रेको डिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. यह प्रोजेक्ट सैंदक से लगभग 50 किलोमीटर दूर है और चीनी कंपनियां इस पर आगे बढ़ने से पहले इलाके में सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा कर रही हैं.
बता दें कि बलूचिस्तान में दुनिया के कुछ सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडार मौजूद हैं. बलोच इसे अपनी संपत्ति मानते हैं और चीनी कंपनियों द्वारा इस इलाके में खनन को अपने संसाधनों की लूट मानते हैं. बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक ऐसा प्रांत बन गया है जहां सरकार का सबसे कम नियंत्रण है.