दुनिया
नेपाल में 29 मई से राजशाही प्रदर्शन चल रहा है. चार दिन से चल रहे इस प्रदर्शन में पुलिसबल ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है.
नेपाल में एक बार फिर से राजतंत्र की वापसी और हिंदू राष्ट्र की घोषणा को लेकर पिछले चार दिनों से प्रदर्शन तेज हो गया है. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के सरकारी आवास की ओर बढ़ रहे थे. निषेधित (वर्जित) क्षेत्र होने के कारण वहां भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. साथ ही तीन लेयर में बैरिकेटिंग किया गया है. इसके साथ ही राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने पूर्व डिप्टी सीएम कमल थापा को पुलिस ने घसीटते हुए हिरासत में लिया. काठमांडू में राजतंत्र समर्थको ने भले ही काठमांडू घाटी बंद का फैसला वापस ले लिए है लेकिन उनका आंदोलन जारी है .
राष्ट्रीय प्रजातंत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और सांसद राजेंद्र लिंगदेह ने सीधा कहा है की प्रशासन ने पुरे काठमांडू में धरना प्रदर्शन पर रोक लगा दिया है. वहीं, नेवर समुदाय की नेता रंजीता श्रेष्ठ ने कहा की राजा हमारे प्रमुख हैं और उनकी वापसी ही लक्ष्य है. आम आंदोलनकारी का कहना है की भारत में एक करोड़ चालिस लाख की जनसंख्या पर 543 संसद सदस्य होते है और नेपाल में साढ़े तीन करोड़ की जनसंख्या में 8 सौ के करीब संसद सदस्य है और इस लूट व्यवस्था को तोडना है. अब आपको काठमांडू का हाल बताएं तो पुरे काठमांडू की सड़के आज वीरान हैं . हर चौक चौराहे पर नेपाल सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती है और राजावादी समूह आंदोलन पर हैं .
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नेपाली जनता देश में राजनीतिक अनिश्चितता से खुश नहीं है. इसके अलावा, राजा ज्ञानेंद्र के सत्ता से हटने के बाद आई सरकारें देश की आर्थिक समस्याओं को दूर करने में विफल रही हैं. बेरोजगारी चरम पर है और महंगाई पिछले कुछ समय से आसमान छू रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर्वतीय हिमालयी देश के लोग वर्तमान शासक वर्ग की विफलताओं से निराश हैं, लेकिन वे पूर्व राजा का समर्थन नहीं करते हैं और कोई भी नहीं चाहता कि उन्हें फिर से सत्ता में लाया जाए. पर्यवेक्षकों का मानना है कि राजशाही की वापसी का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि कोई भी पूर्व राजा की वापसी नहीं चाहता. इससे पहले, नेपाल पर 240 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न राजाओं का शासन रहा है.
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