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विनाशकारी बाढ़ और तबाही से जूझ रहे नेपाल में मंगलवार देर रात 5.0 तीव्रता का तेज भूकंप आया. भूकंप का केंद्र जमीन से 143 किलोमीटर की गहराई में स्थित था.
Nepal Earthquake: विनाशकारी बाढ़ और भारी तबाही के जख्मों से उबर रहे पड़ोसी देश नेपाल में मंगलवार देर रात भूकंप का एक तेज झटका महसूस किया गया. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई है. भूकंप रात करीब 9:38 बजे (IST) आया, जिसका केंद्र पृथ्वी की सतह से लगभग 143 किलोमीटर की गहराई में स्थित था.
हालांकि, मंगलवार रात आए इस भूकंप से जान-माल के किसी भी तत्काल बड़े नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन हाल ही में आई आपदाओं से सहमे लोगों के बीच इस कंपन से दहशत फैल गई.
नेपाल और उससे सटे हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से लगातार भूकंपीय हलचल दर्ज की जा रही है. मंगलवार रात आए इस तेज झटके से ठीक दो दिन पहले, यानी रविवार, 6 सितंबर को भी नेपाल में 3.8 तीव्रता का एक हल्का भूकंप महसूस किया गया था. वह भूकंप शाम को 6:59 बजे आया था और उसका केंद्र जमीन से 20 किलोमीटर की गहराई में स्थित था.
EQ of M: 5.0, On: 08/09/2026 21:38:39 IST, Lat: 29.022 N, Long: 83.978 E, Depth: 143 Km, Location: Nepal.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) September 8, 2026
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इसके अलावा, इसी क्षेत्र में आने वाले तिब्बत में भी बीते 3 सितंबर को 5.0 तीव्रता का एक भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र केवल 14 किलोमीटर की गहराई में था. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पूरे बेल्ट में टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार बन रहे दबाव के कारण ऐसे झटके आ रहे हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
भूकंप की यह श्रृंखला ऐसे समय में सामने आई है जब नेपाल और तिब्बत सीमाई क्षेत्र पहले से ही भीषण प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं. बीते 26 अगस्त को नेपाल के तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी. भोटे कोशी नदी में आए इस उफान ने रास्ते में आने वाले कई रिहायशी इलाकों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था. इस बाढ़ के कारण चीनी सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट के पास बड़े पैमाने पर मिट्टी धंसने और मलबे के बहाव की घटना भी दर्ज की गई थी.
शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि यह अचानक आई विनाशकारी बाढ़ किसी भूकंप के कारण आई थी. लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बाद में स्पष्ट किया कि यह तबाही किसी भूकंप से नहीं बल्कि अचानक ग्लेशियर टूटने और उसके मलबे के भारी बहाव के कारण हुई थी. आपदा के आठवें दिन भी प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण बाढ़ आपदा में अब तक कम से कम 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता हैं. बचाव टीमों ने अब तक करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. उधर तिब्बत में भी इस आपदा के कारण 16 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 550 लोग लापता हैं, जिससे सीमा के दोनों ओर कोहराम मचा हुआ है.