दुनिया
साइकी स्पेसक्राफ्ट वर्तमान में मंगल ग्रह के पास से ग्रेविटी असिस्ट तकनीक का उपयोग करते हुए गुजर रहा है, जिससे वह बिना अतिरिक्त ईंधन के अपनी गति बढ़ा सके.
नासा के साइकी (Psyche) स्पेसक्राफ्ट ने अंतरिक्ष की अपनी लंबी यात्रा के दौरान एक बहुत ही खूबसूरत और यादगार पल कैमरे में कैद किया है. 3 मई, 2026 को इस यान ने मंगल ग्रह की तरफ अपना कैमरा घुमाया और उसकी एक ऐसी तस्वीर ली जिसे देखकर हर कोई दंग रहा गया. जिस वक्त यह फोटो खींची गई, साइकी स्पेसक्राफ्ट मंगल ग्रह से करीब 48 लाख किलोमीटर दूर था.
शायद आप सोच रहे होंगे कि क्या यह यान मंगल की सैर करने गया है? तो जवाब है- नहीं. यह यान मंगल पर रुकने नहीं जा रहा, बल्कि वह मंगल के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल एक गुलेल की तरह कर रहा है. विज्ञान की भाषा में इसे ग्रेविटी असिस्ट कहते हैं.
इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि यह यान मंगल के खिंचाव से थोड़ी रफ्तार उधार ले रहा है ताकि बिना एक्स्ट्रा ईंधन खर्च किए और भी तेजी से आगे बढ़ सके. 15 मई, 2026 को यह मंगल के सबसे करीब होगा और फिर वहां से अपनी असली मंजिल की ओर निकल जाएगा, एक धातु से भरपूर एस्टेरॉयड, जिसका नाम भी 'साइकी' ही है. यह एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद एस्टेरॉयड बेल्ट में है और यान वहां 2029 तक पहुंचेगा.
तस्वीर में मंगल ग्रह एक पतले हंसिये या क्रेसेंट जैसा दिख रहा है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि साइकी यान मंगल के करीब एक खास कोण से पहुंच रहा है. इसका मतलब है कि सूरज यान और मंगल दोनों के पीछे और ऊपर की तरफ है, इसलिए मंगल का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा ही रोशनी में चमकता हुआ दिखाई दे रहा है.
यह फोटो यान के मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर से ली गई है, जो रोशनी की अलग-अलग तरंगों को पकड़ सकता है. हैरानी की बात यह है कि यह फोटो सिर्फ 2 मिलीसेकंड के लिए कैमरा खोलकर ली गई. इसके बावजूद फोटो के कुछ हिस्से बहुत ज्यादा चमक रहे हैं क्योंकि मंगल से टकराकर आने वाली धूप उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज थी.
तस्वीर में एक और दिलचस्प बात दिखी. मंगल के वायुमंडल में मौजूद धूल सूरज की रोशनी को बिखेर देती है, जिससे वह चमकती हुई पट्टी ग्रह के चारों ओर थोड़ी ज्यादा फैली हुई लग रही है. लेकिन गौर से देखने पर इस पट्टी के दाईं ओर एक छोटा सा गैप या खाली जगह नजर आती है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जगह मंगल के उत्तरी ध्रुव के ठीक ऊपर है. वहां शायद मौसम के हिसाब से बनने वाले बादल या धुंध छाई हुई है, जिसकी वजह से रोशनी वहां से पार नहीं हो पा रही और वहां अंधेरा दिख रहा है.
भले ही यह फोटो देखने में बहुत फिल्मी और सुंदर है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए इसका मकसद तकनीकी है. इन तस्वीरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से यान के कैमरों को कैलिब्रेट या सेट करने के लिए किया जा रहा है, ताकि जब 2029 में साइकी यान अपने असली लक्ष्य धातु वाले एस्टेरॉयड तक पहुंचे, तो वह बिल्कुल सटीक और साफ तस्वीरें ले सके.