दुनिया
दुनियाभर में मुस्लिमों की आबादी न केवल तेजी से बढ़ रही है बल्कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रीलिजियस ग्रुप भी बन चुका है. 2010 से 2020 के बीच अगर दुनियाभर में मुस्लिमों की जनसंख्या की बात करें तो इसमें 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
दुनियाभर में तेजी से मुस्लिम जनसंख्या में बढ़ोतरी हो रही है. यानी ये आंकड़ा 170 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ हो गया है. इस्लाम इस पूरे दस वर्षों में यानी 2010 से 2020 के बीच सबसे तेजी से बढ़ने वाला रीलिजियस ग्रुप बन गया है. इसका परिणाम यह हुआ कि ग्लोबल पॉपुलेशन में मुसलमानों की हिस्सेदारी 24% से बढ़कर 26% हो गई है. हालांकि दुनिया की जनसंख्या 2010 से 2020 के बीच बढ़ी है और इसी अवधि में अधिकांश रीलिजियस ग्रुप की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है. यह जानकारी Pew Research Center द्वारा दी गई है जिसमें 2,700 से अधिक सेंसस और सर्वेक्षणों का विश्लेषण कर तैयार किया गया है. Pew Research Center समय समय पर दुनिया के डेमोग्राफिक चेंजेज से लेकर पॉपुलेशन तक पर शोध करता रहा है.
इस रिसर्च में यह भी पता चला है कि ईसाई दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना हुआ है. लेकिन 2010 से 2020 के बीच अगर ग्लोबल पॉपुलेशन की बढ़ोतरी की बात करें तो ईसाइयों की जनसंख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ पाई जैसी की ग्लोबल पॉपुलेशन बढ़ी. जबकि मुसलमानों की संख्या में 34.7 करोड़ (347 मिलियन) की वृद्धि हुई है जो कि सभी दूसरे धर्मों में हुई बढ़ोतरी से बहुत अधिक है और दुनिया की कुल आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत 1.8 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 25.6% हो गया है.
अगर मुसलमानों की दुनिया में बात करें तो वे मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के एरिया में ये बहुमत में हैं इसके अलावा पूरी दुनिया में अल्पसंख्यक हैं. इस्लाम अल्पसंख्यक एशिया के प्रशांत क्षेत्र में भी है जहां दुनिया भर से अधिक मुस्लिम रहते हैं.
आंकड़े बताते हैं कि मुसलमानों की पूरी दुनिया की आबादी में 26 फीसदी हिस्सेदारी है. दूसरी तरफ नॉन-मुस्लिम की आबादी में सिर्फ 9.7% की बढ़ोतरी देखी गई है. इसमें हिंदुओं की पॉपुलेशन में 0.1% की कमी दर्ज की गई है. रिसर्च से यह भी पता चला है कि साल 2010 में हिंदुओं की आबादी 15 फीसदी थी, जो साल 2020 तक घटकर 14.9 हो गई. 2010 से 2020 के बीच सभी जियोग्राफिक रीजन में मुसलमानों की संख्या बढ़ी, लेकिन यह वृद्धि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्तर पर देखी गई.
मुसलमानों की वृद्धि दर नॉर्थ अमेरिका में सबसे अधिक रही, जहां 52 फीसदी की वृद्धि के साथ 2020 में मुस्लिम जनसंख्या 5.9 मिलियन (59 लाख) तक पहुंच गई. इसके बाद सब सहारा अफ्रीका का नंबर रहा जहां, मुस्लिम जनसंख्या 34% की बढ़ोतरी के साथ 369 मिलियन (36.9 करोड़) हो गई.
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बता दें कि रिसर्च से यह भी पता चला है कि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि हर क्षेत्र में गैर-मुस्लिम जनसंख्या की तुलना में अधिक रही है. हालांकि इसमें एक अपवाद भी है.
लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में, जहां मुस्लिम जनसंख्या सबसे कम है, मुसलमानों की संख्या में केवल 6% की वृद्धि हुई, जबकि उसी क्षेत्र की गैर-मुस्लिम जनसंख्या 10% बढ़ी है.
नतीजतन, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन को छोड़कर सभी क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत सबसे ज़्यादा बढ़ा, जहां 2020 में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़कर 26% हो गई — यानी 1.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई. वहीं, सब-सहारा अफ्रीका में मुसलमानों की हिस्सेदारी 0.8 प्रतिशत अंक की वृद्धि के साथ 33% हो गई और यूरोप में 0.7 प्रतिशत अंक की बढ़त के साथ, मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 6% हो गया है.
दुनिया के लगभग एक-तिहाई मुसलमान इंडोनेशिया, पाकिस्तान और भारत में रहते हैं. इनमें इंडोनेशिया सबसे आगे है. 2020 के अनुसार, लगभग 24 करोड़ मुसलमान (जो कि दुनिया के कुल मुसलमानों का करीब 12% है). दुनिया के 10 देशों में कुल मिलाकर लगभग 1.3 अरब मुसलमान रहते हैं, जो कि पूरी दुनिया की मुस्लिम आबादी का 65% है. इन 10 में से 9 देशों में इस्लाम बहुसंख्यक रीलिजन है भारत इसमें अपवाद है. 2020 में भारत में रहने वाले 213 मिलियन (21.3 करोड़) मुसलमान, देश की कुल जनसंख्या का केवल 15% ही हैं.
रिसर्च से ये भी पता चला है कि पांच देशों में, मुस्लिम आबादी का हिस्सा कम से कम 5 प्रतिशत अंकों से बदला है. इन पांच देशों में कज़ाख़स्तान, बेनिन और लेबनान में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा, जबकि तंजानिया और ओमान में यह घटा है.पिछले दिनों कई दुनिया के कई देशों में मुस्लिमों की एंट्री पर रोक लगाई गई. कई जगहों पर उन्हें देश से निकाला भी गया. अगर बात करें यूरोप की तो वहीं के कई देशों में मुस्लिम आबादी का अनुपात बढ़ा, जिसका कारण इमिग्रेशन और मुसलमानों में औसत से अधिक प्रजनन दर को देखा गया है. हालांकि, किसी भी यूरोपीय देश में यह वृद्धि 5 प्रतिशत अंक से अधिक नहीं हुई है. उदाहरण के तौर पर, अगर बात करें सीरियाई युद्ध के शरणार्थियों की जो यूरोप के कई देशों में पहुंचे जिसकी वजह से भी कुछ देशों में मुस्लिम जनसंख्या में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है. जैसे: स्वीडन में देखें तो सीरियाई शर्णार्थियों की वजह से 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है वहीं ऑस्ट्रिया में 3 प्रतिशत की तो जर्मनी में 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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