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बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए नई योजना के तहत जापान अपनी Taigei-class और भविष्य की पनडुब्बियों के लिए वीएलएस सिस्टम विकसित करने पर अरबों येन खर्च कर रहा है.
Japan vs China: दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दादागिरी को देखते हुए जापान अपनी नौसेना और रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति पर काम कर रहा है. जापान अपनी समुद्र के नीचे से हमला करने की क्षमता को बढ़ाने की योजना बना रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने सबमरीन से लॉन्च की जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें विकसित करने के लिए अपनी सरकार से फंड की मांग की है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2027 के रक्षा बजट में इस फंड को मंजूरी देने की मांग की है.
जापान एक ऐसा अंडरवाटर स्ट्राइक सिस्टम विकसित करना चाहता है जिससे समुद्र में छिपे रहकर अलग-अलग जगहों से लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने की क्षमता हासिल की जा सके. जापान के रक्षा मंत्रालय ने बिना चालक वाले अंडरवाटर व्हीकल (UUVs) के लिए स्टैंड-ऑफ मिसाइल लॉन्च मॉड्यूल पर रिसर्च के लिए भी फंड मांगा है. हालांकि जापान ने आधिकारिक रूप से पानी के नीचे से लॉन्च की जाने वाली प्रस्तावित मिसाइल की रेंज, आकार, प्रोपल्शन सिस्टम या वॉरहेड के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.
जापान की चिंता का सबसे बड़ा कारण ईस्ट चाइना सी, ताइवान जलडमरूमध्य और फर्स्ट आइलैंड चेन में चीन की बढ़ती घुसपैठ है. इस क्षेत्र में चीनी नौसेना और मिसाइल तंत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है. जापान को चीन के साथ-साथ उत्तर कोरिया से भी खतरा महसूस हो रहा है. पिछले कुछ सालों में उत्तर कोरिया मिसाइलों की लगातार टेस्टिंग की है.
जापान अपनी पनडुब्बियों से दागी जाने वाली ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित कर रहा है जो मैक 5 (ध्वनि की गति से 5 गुना अधिक) या उससे तेज़ गति से हमला कर सकती है. दरअसल, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HVGP) की खासियत यह है कि ये पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह तय रास्ते पर जाने के बजाय हवा में अपना रास्ता बदल सकती है. इसे किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा इंटरसेप्ट बेहद कठिन होता है.
वर्तमान में जापानी पनडुब्बियां केवल टॉरपीडो ट्यूब के माध्यम से हथियार दाग सकती हैं. अब क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे को देखते हुए नई योजना के तहत जापान अपनी Taigei-class और भविष्य की पनडुब्बियों के लिए वीएलएस सिस्टम विकसित करने पर अरबों येन खर्च कर रहा है. प्रत्येक वीएलएस मॉड्यूल में 7 से 8 सेल होंगे. इस तरह एक पनडुब्बी 14 से 24 मिसाइलें ले जा सकेगी.
जापान अमेरिकी टोमहॉक मिसाइलें भी खरीद रहा है और अपनी Type 12 मिसाइलों की रेंज बढ़ाकर 1,000 किमी तक करने पर भी काम कर रहा है. ये कदम जापान की बदलती रणनीति को दिखाते हैं. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जापान की नीतियां केवल आत्मरक्षा तक सीमित थीं. लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए जापान अपनी रक्षा रणनीति को जवाबी हमले की दिशा में मोड़ रहा है. जापान को दुनिया के तकनीकी रूप से सबसे सक्षम देशों में एक गिना जाता है. अब जापान इस क्षमता का उपयोग रक्षा क्षेत्र में करके हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक बेहद शक्तिशाली और सुरक्षित नौसैना खड़ी कर रहा है. जापान, भारत के साथ भी रक्षा संबंध नए स्तर पर ले जा रहा है.