दुनिया
जापान के चिबा प्रांत में भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 4 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि नरीता एयरपोर्ट पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं और लाखों लोगों को घर छोड़ने का आदेश दिया गया है।
Japan Heavy Rain News In Hindi: जापान के पूर्वी हिस्से, विशेषकर चिबा प्रांत में कुदरत ने जबरदस्त तांडव मचाया है. गुरुवार रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. इस आपदा में अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने 4 लाख से अधिक नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का कड़ा आदेश जारी किया है.
बारिश और बाढ़ के कारण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है. टोक्यो के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक, नरीता एयरपोर्ट पर करीब 7,000 यात्री पूरी रात फंसे रहे. इसके अलावा, परिवहन संपर्क टूटने के कारण लगभग 1,700 लोगों ने चिबा प्रीफेक्चरल सरकारी इमारत में शरण ली है. गवर्नर तोशिहितो कुमागाई ने स्थिति को देखते हुए कहा कि अपने करियर में अभी तक ऐसी आपदा का सामना नहीं किया.
चिबा में बारिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 115 मिमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बरसा. यह मात्रा आमतौर पर अगस्त के पूरे महीने में होने वाली औसत बारिश के बराबर है. भीषण हालात को देखते हुए जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने पहली बार चिबा प्रांत के लिए Level 5 की उच्चतम स्तर की चेतावनी जारी की है. करीब 45,000 घरों की बिजली गुल हो गई है और सड़कों पर पानी पांच मंजिला इमारत की ऊंचाई तक उछलता हुआ देखा गया.
बाढ़ के पानी ने कई लोगों को संभलने का मौका भी नहीं दिया. इचिकावा शहर में एक बुजुर्ग व्यक्ति का शव जलमग्न सड़क पर तैरता मिला, जबकि साकुरा शहर में एक 66 वर्षीय महिला की मौत उनकी कार के पानी में फंसने के कारण हो गई.
दो अन्य लोगों की भी अपनी कारों से बाहर न निकल पाने के कारण डूबने से मौत हो गई. राहत और बचाव कार्यों में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए सेना के जवानों को तैनात किया गया है.
हालांकि शुक्रवार को बारिश की रफ्तार थोड़ी कम हुई है, लेकिन नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बरकरार रखी है. भूमि और बुनियादी ढांचा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है, इसलिए लोग स्थानीय नगर पालिकाओं की सलाह मानकर सुरक्षित स्थानों पर रहें.
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जापान में इस तरह की चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में लगातार इजाफा हो रहा है.