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बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र विरोधी पार्टी से हटाया बैन, अब "जमात-ए-इस्लामी" लड़ेगी चुनाव

शेख हसीना सरकार ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में जमात ए इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था. अब बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी पर लगा बैन हटा दिया.

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बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र विरोधी पार्टी से हटाया बैन, अब "जमात-ए-इस्लामी" लड़ेगी चुनाव
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पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में इन दिनों काफी उथल-पुथल मची हुई है. इस बीच खबर सामने आई है कि बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने जमात ए इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. आपको बता दें कि, शेख हसीना सरकार ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में पार्टी पर बैन लगाया था. ऐसे में अब जमात के इस्लामी के चुनाव में हिस्सा लेने के रास्ते खुल गए हैं. कोर्ट के अधिकारियों ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय प्रभाग ने आयोग को पार्टी का पंजीकरण बहाल करने का निर्देश दिया. साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह चुनाव आयोग (ईसी) पर निर्भर करता है कि जमात चुनाव लड़ सकती है या नहीं. 

2018 में रद्द हुआ था पंजीकरण 

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने दिसंबर 2018 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद जमात का पंजीकरण रद्द कर दिया था. कथित तौर पर जमात बांग्लादेश की 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता का विरोध करने वाले दलों में शामिल था. इससे पहले 2013 में, बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण रद्द कर दिया था. उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया कि पार्टी राष्ट्रीय चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं है. 

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शेख हसीना सरकार ने लगाया था बैन 

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने 5 अगस्त, 2024 को उनके पद से हटाए जाने से कुछ दिन पहले ही पार्टी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिसका नेतृत्व स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) नामक मंच द्वारा किया गया था. जमात और कई अन्य दलों ने एसएडी का समर्थन किया था. शेख हसीना के पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी ने उस पर प्रतिबंध लगाने वाले 2013 के न्यायालय के आदेश की समीक्षा के लिए अपील की थी. जमात के प्रमुख वकीलों में से एक मोहम्मद शिशिर मनीर ने कहा, "आज एक दशक से चली आ रही कानूनी लड़ाई का समापन हो गया. हमें उम्मीद है कि इस फैसले के बाद बांग्लादेश में एक जीवंत संसद होगी। हमें उम्मीद है कि मतदाता अब अपनी पसंद के जमात उम्मीदवार को वोट देंगे."

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