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नेतन्याहू के लिए बड़ा संकट बन गया ये छोटा सा मुद्दा, कभी भी गिर सकती है सरकार, 5 पॉइंट्स में समझे

इजराइल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार पर तलवार लटकी हुई नजर आ रही है. पीएम नेतन्याहू के लिए एक छोटा सा मुद्दा इस समय बड़ा सिरदर्द बन चुका है. आइए समझते है कि क्या है पूरा मामला

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नेतन्याहू के लिए बड़ा संकट बन गया ये छोटा सा मुद्दा, कभी भी गिर सकती है सरकार, 5 पॉइंट्स में समझे

benjamin netanyahu government coalition

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इजराइल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. विपक्ष ने संसद भंग करने का प्रस्ताव पेश किया है. नेतन्याहू की सरकार को एक ऐसे मुद्दे ने हिलाकर रख दिया जिसके नतीजे बहुत बडे़ सियासी गणितीय समीकरण को बदल सकते हैं. एक तरफ जहां गाजा युद्ध के बीच इजराइल सेना सैनिकों की भारी कमी से जूझ रही है तो वहीं प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने ही सहयोगियों से जूझ रहे हैं. दरअसल ये पूरा मामला इजरायली सेना में भर्ती को लेकर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों यानी हरेदी समुदाय की छूट खत्म करने का हैं. 

चुनाव कराने की नौबत

1. अब यहां के सियासी गणित को समझिए, दरअसल जैसे ही हरेदी युवाओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी तो वहां तुरंत नेतन्याहू की सरकार गिर जाएगी. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि नेतन्याहू सरकार के दो पिलर अपना समर्थन वापस ले लेंगे. यदि संसद में विपक्ष के प्रस्ताव को सरकार के सहयोगी दलों  का समर्थन मिल गया जल्द ही यहां चुनाव कराने की नौबत आ सकती है. 

2. ये दो पिलर है  पार्टी दशास और यूनाइटेड टोरा जूडाइज़्म. दरअसल जैसे ही हेरदी युवाओं को गिरफ्तार करने की बात सामने आई है ये दोनों दल भड़क उठे. उन्होंने साफ कह दिया है, अगर येशिवा छात्रों को गिरफ्तार किया गया, तो सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे.

3. अब अगर ऐसा हुआ तो फिर नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में हैं.  बता दें कि इजरायली सेना ने हाल ही में उन युवाओं पर कार्रवाही शुरू की है. जो अनिवार्य सैन्य सेवा के आदेश के बावजूद रिपोर्ट नहीं कर रहे. यह नियम हर नागरिक पर लागू हो रहा है. 

4. लेकिन हरेदी नेताओं का कहना है कि इस नियम के तहत उनके समुदाय को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है. इसी के चलते उन्होंने कहा है कि अगर छात्रों की गिरफ्तारी हुई तो शास और यूटीजे गठबंधन से रिश्ता तोड़ देंगे.  

5. जनता के दबाव के चलते सुप्रीम कोर्ट ने हरेदी समुदाय को दी गई छूट रद्द कर दी. सेना ने करीब 10 हजार हरेदी युवाओं को बुलावा भेजा, लेकिन महज कुछ ही लोगों ने रिस्पॉन्ड किया. अब यहां पर मोर्चा मिलिट्री ने संभाल लिया जो कि नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया हैं. 

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