दुनिया
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता से होर्मुज जलडमरूमध्य रास्ता खोलने पर सहमति बन गई है, लेकिन यहां से जहाज निकलने और स्थिति सामान्य होने में अभी महीनों का समय लग सकता है. इसकी कई वजह हैं...
.ईरान और अमेरिका के होर्मुज खोलने पर बनी सहमति
.शेयर बाजार में उछाल के साथ ही क्रूड ऑयल के दामों में आई गिरावट
.होर्मुज खुलने के बाद भी यहां से जहाज निकलने में महीनों का समय लगेगा
.हॉर्मुज में फंसे हैं 2000 से भी ज्यादा जहाज
पिछले कई महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बाद शांति समझौता की किरण जगी है. दोनों देशों की होर्मुज स्टेट खोलने पर सहमति हो गई है. इसका असर सोमवार को मार्केट खुलते ही देखने को मिला. वहीं क्रूड ऑयल के दामों में भी कटौती आई है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि महीनों से होर्मुज में फंसे दुनिया जहाज यहां निकल सकेंगे. इसके साथ ही ट्रंप ने तुरंत होर्मुज खोलने के साथ ही ब्लॉकेड हटाने की बात कही है, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है यानी युद्ध के समय से होर्मुज पर फंसे जहाज एक या दो दिन में नहीं निकल सकेंगे. इन्हें अभी 1 या 2 नहीं, बल्कि उसे भी ज्यादा का समय लग सकता है. इससे साफ है कि तेल और गैस की सही सप्लाई और बढ़ते दामों को रोकने में अभी समय लग सकता है...
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को निकालने से पहले माइन को हटाना होगा. इसका काम जल्द शुरू हो जाएगा, लेकिन इसमें कुछ घंटे या दिन का नहीं, बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा समय लगता है. इसके बाद भी समुद्री ट्रैफिक को शुरू करने से पहले सावधानी देखी जाएगी. वहीं शिपिंग और ऊर्जा क्षेत्र के एक्सपर्ट्स का दावा है कि भले ही राजनीतिक स्तर पर सहमति बन गई हो, लेकिन समुद्र में खड़े हजारों जहाजों, सुरक्षा जोखिमों, बीमा लागत और लॉजिस्टिक बाधाओं को देखते हुए हालात सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं. यही वजह है कि दुनिया को राहत मिलने के बावजूद पूरी तरह चैन की सांस लेने में अभी समय लग सकता है.
रॉयटर्स के अनुसार, प्रोफेसर वेट्ज ने कहा कि शिपिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले भरोसा होना जरूरी है, जहां महीनों तक बमबारी हुई हो, वहां एक दम से भरोसा कर पाना आसान नहीं है. इसके लिए समय लगेगा. सही और सावधानी पूर्ण रास्ता चुनना पड़ेगा. इसमें हफ्तों का समय लग सकता है. पहले कुछ जहाज निकलेंगे, सब कुछ ठीक रहा तो जहाज धीरे धीरे कर रफ्तार भरेंगे ओर हॉर्मुज में स्थितियां सामान्य होंगी.
युद्ध और नाकेबंदी के बीच होर्मुज स्ट्रेट के दोनों ओर जहाजों की लंबी कतारें लग गईं. रॉयर्टस के अनुसार अलग अलग शिपिंग आकलनों के अनुसार, युद्ध के बीच करीब 2,000 जहाज अलग-अलग समय पर खाड़ी क्षेत्र में फंस गये थे. कुछ रिपोर्टों में सैकड़ों तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के इंतजार की बात भी कही गई है. वहीं जापान से जुड़े कम से कम 38 जहाज अभी भी क्षेत्र में फंसे हुए बताये जा रहे हैं. समस्या सिर्फ रास्ता खुलने की नहीं है, जिन जहाजों को पहले निकलना है, उन्हें प्राथमिकता देनी होगी. बंदरगाहों में बर्थ उपलब्ध करानी होगी, टग बोट और पायलट सेवाओं की व्यवस्था करनी होगी और माल उतारने की क्षमता भी बढ़ानी होगी. इसलिए जहाजों की कतार एक-दो दिन में खत्म नहीं होने वाली.
संडे गार्जियन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य ग्लोबल ट्रेड के लिए बड़ा समुद्री रास्ता है. इसके सामान्य स्थिति में होने में यहां अच्छा खासा ट्रैफिक रहता है. ईरान अमेरिका युद्ध से पहले दुनिया का करीब 20 प्रतिशत गैस और तेल के जहाज इसी रास्ते से जानते थे. यही वजह है कि यहां युद्ध के बीच 2000 हजार से भी ज्यादा जहाज फंस गये हैं. अब यहां से निकलने के लिए पहले से फंसे शिपिंग कंपनी के जहाजों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसमें सबसे पहले पूरब की तरफ जहाज बढ़ेंगे. ये फारस की खाड़ी पर्शियन गल्फ से निकलेंगे.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए फ्रेमवर्क समझौते में 60 दिन के युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से जहाजों के लिए खोलने पर सहमति बनी है. दोनों पक्षों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया भी तय की गई है. समझौते में समुद्री मार्ग पर सैन्य टकराव रोकने, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने और आगे परमाणु मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का रास्ता भी शामिल है. हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है. यही वजह है कि कई शिपिंग कंपनियां अंतिम नियमों और सुरक्षा गारंटी का इंतजार कर रही हैं.
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