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अमेरिका से बात बनने पर ईरान को मिलेगा यूरोप का पूरा साथ, ढीली पड़ सकती हैं पाबंदियां, बढ़ेगा व्यापार

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत दुनिया भर के कई देशों ने किया है. इसके साथ ही 4 यूरोपिय देशों ने ईरान से प्रतिबंध हटाने के साथ ही व्यापार करने का रास्ता खोल दिया है, जिसका लाभ ईरान को आर्थिक रूप से मिलेगा. 

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अमेरिका से बात बनने पर ईरान को मिलेगा यूरोप का पूरा साथ, ढीली पड़ सकती हैं पाबंदियां, बढ़ेगा व्यापार

Iran US Deal 

(Credit Image AI)

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.अमेरिका और ईरान के बीच डील का दुनिया के कई देशों ने किया स्वागत
.अमेरिका से सहमति बनते ही यूरोप ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाया
.ईरान को फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और जर्मनी का व्यापारिक साथ मिलेगा
. 19 जून को अमेरिका और ईरान डील पर साइन करेंगे.

107 दिनों के लंबे युद्ध के बाद ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना बढ़ गई है. ईरान और यूएस के बीच कई बातों को लेकर सहमति बन रही है. अमेरिका के कहने पर हॉर्मुज का रास्ता खोलते ही ईरान के समर्थन में यूरोप आ गया है. इसमें फ्रांस से लेकर इटली ने ईरान से न सिर्फ प्रतिबंध हटाने की तैयारी शुरू कर दी है, बल्कि E4 देशों ने पाबंदियों में ढील देने के साथ ही व्यापार बढ़ाने का भी इशारा कर दिया है. इसकी वजह अमेरिका के साथ ईरान ने शांति समझौते में परमाणु कार्यक्रम सीमित करने से लेकर न्यक्लियर हथियार बनाने का वादा कर दिया है. 

बिना शर्त व्यापार करने को तैयार

ई4 देश फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली के नेताओं ने सोमवार सुबह अमेरिका और ईरान के बीच शांति सहमति के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने ईरान के इस कदम को एक राजनयिक सफलता बताय. साथ ही ईरान को जल्द ही ​समझौता करने की सलाह दी हे. इसके साथ ही चारों देशों के नेताओं ने अमेरिका, ईरान के बीच वार्ता कराने में शामिल देशों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि "हम अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन की घोषणा कास्वागत करते हैं. साथ ही ईरान पर लगे प्रतिबंध को हटाकर व्यापार के लिए हाथ बढ़ाते हैं. 

ईरान पर इस वजह है पश्चिम का प्रतिबंध, उठाना पड़ता है नुकसान

ईरान पर अमेरिका, यूरोपीय संघ यूके और दूसरे पश्चिमी देशों ने कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. इनकी वजह से ईरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को दूसरे देशों को प्रॉक्सी को बढ़ावा देना कहा गया है. इन प्रतिबंध का उद्देश्य ईरान को बांधना और उसकी अर्थव्यवस्था क्षमताओं को कमजोर बनाये रखना है. इसकी वजह से ईरान दुनिया के कई बड़े हिस्सों में अपना तेल नहीं बेच नहीं पाता. यह ईरान की अर्थव्यवस्था बढ़ोतरी एक बड़ी बांधा है, लेकिन अब फ्रांस, यूरोप, जर्मनी और इटली के ईरान से प्रतिबंध हटाने से व्यापारिक रूप से इस देश को बड़ा फायदा हो सकता है. इसकी अर्थव्यवस्था में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो सकती है. 

ईरान अमेरिका के डील में शांति पर समझौता

अमेरिका और ईरान में पिछले 107 दिनों से चल हरे युद्ध पर शांति समझौता लगभग हो गया है. हालांकि अभी तक इसकी कोई लिखित दस्तावेज सामने नहीं आये हैं, लेकिन इसको तय माना जाता है. वहीं दोनों देशों में आपसी समझौता कराने में कई दूसरे देशों ने अहम भूमिका निभाई है. रॉयर्टस के अनुसार, शहबाज शरीफ ने कहा है कि ईरान और अमेरिका स्विट्जरलैंड में 19 जून को समझौते पर दस्तखत करेंगे.इसके साथ ही हॉर्मुज पर फंसे जहाजों का रास्ता खोल दिया जाएगा. यहां से आगे भी तेल और गैस के लिए आवाजाही जारी रहेगी. 

28 फरवरी से शुरू हुई थी ईरान, इजरायल और अमेरिका की लड़ाई

आपको बता दें कि अमेरिका और इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 से हुई थी. इसके करीब 60 दिन बाद 8 अप्रैल को दोनो देशों में अस्थायी सीजफायर हुआ था, लेकिन अचानक से हमले फिर से तेज हो गये थे, हालांकि दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रही. 107 दिन बाद दोनों देशों में फिर से हॉर्मुज खोलने के साथ ही शांति को लेकर सहमति बनी है. 19 जून को दोनों ही देश इस पर मोहर लगाये गये.

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