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अमेरिकी युद्धपोतों को 'आंख' वाली मिसाइल से निशाना बना रहा ईरान!'कासिम बशीर' कितनी खतरनाक है?

अमेरिका के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए ईरान ऐसी मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है जो लक्ष्य को देखकर और उसकी गर्मी को महसूस करके हमला करती है. ये मिसाइल अमेरिकी नेवी के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है.

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अमेरिकी युद्धपोतों को 'आंख' वाली मिसाइल से निशाना बना रहा ईरान!'कासिम बशीर' कितनी खतरनाक है?

कासिम बसीर मिसाइल पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम है. (AI इमेज)

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  • कासिम बसीर मिसाइल पैंतरेबाज़ी करने में सक्षम है
  • कासिम बसीर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेड सिस्टम से लैस है
  • कासिम बसीर को आंख वाली मिसाइल भी कहा जा रहा है

अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए ईरान एक ऐसी मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेड सिस्टम से लैस है. इस युद्धनीति ने अमेरिकी नेवी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऐसी रिपोर्ट सामने आई है कि ईरान द्वारा हालिया हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइलें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर से लैस थीं. ये सीकर कैमरों और लाइट सेंसर का इस्तेमाल करके लक्ष्यों की पहचान करते हैं और उनका पीछा करते हैं. यही कारण है इसे आंख वाली मिसाइल भी कहा जा रहा है. 

'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अमेरिकी बलों और जहाजों पर इस मिसाइल के हमलों की पुष्टि की है. हालांकि अमरिकी सेना का ये भी कहना है कि युद्धपोतों पर किए गए सभी हमले नाकाम रहे. ईरान ने ये हमले तब किए जब हाल ही में अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया. 

किस मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है ईरान?

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए नियुक्त सचिव मोहसेन ने कहा है कि अमेरिकी जहाजों के खिलाफ हमले में एक नई खास एंटी-डिस्ट्रॉयर मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था. माना जा रहा है कि ये मिसाइल 'कासिम बशीर' थी. हालांकि हमले में इस्तेमाल की गई मिसाइल की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. 

क्या है कासिम बशीर की खासियत?

ईरान ने मई 2025 में अपनी 'शहीद हज कासिम' बैलिस्टिक मिसाइल के अपग्रेडेड वर्शन के तौर पर 'कासिम बशीर' मिसाइल  को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया था. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सीकर लगे हैं. यानी  इसे एक तरह से आंखें मिली हुई हैं. 

पारंपरिक मिसाइलें अपने लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए जीपीएस या सैटेलाइट सिग्नलों पर निर्भर करती हैं. ऐसी मिसाइलों को इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए भटकाया या विफल किया जा सकता है. इसके विपरीत, कासिम बशीर उड़ान के आखिरी चरण में कैमरों और लाइट सेंसर्स के जरिए खुद लक्ष्य को पहचानकर ट्रैक करती है. ये चलते हुए युद्धपोत को भी निशाना बना सकती है. इसे जीपीएस की आवश्यकता नहीं होती. 

ईरान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सॉलिड-फ्यूल वाली इस मिसाइल की रेंज लगभग 1,200 किलोमीटर है और इसमें मैन्युवरेबल वॉरहेड लगा है. माना जाता है कि कासिम बशीर मिसाइल लगभग 500 किलोग्राम का वॉरहेड ले जा सकती है. हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर वॉरहेड के वजन का खुलासा नहीं किया है. 1,200 किलोमीटर की रेंज के कारण इसे मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल की श्रेणी में रखा गया है. 

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