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ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार (Ali Khamenei Funeral) की नई तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है.
ईरान के इतिहास में एक बहुत बड़े और अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत वहां के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की नई तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है. तेहरान प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, खामेनेई को विदाई देने की राजकीय प्रक्रिया इस साल 4 जुलाई से शुरू होगी, जो कई दिनों तक चलेगी.
इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा. प्रशासन ने यह फैसला देश में चल रहे मुहर्रम के पवित्र महीने और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए लिया है. दरअसल, पहले तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार यह अंतिम संस्कार जल्दी होना था, लेकिन तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने साफ किया कि इसमें बदलाव करना जरूरी था.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने शनिवार (13 जून 2026) को बताया कि मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों के दौरान शिया समुदाय के लोग बेहद अकीदत और गम के साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं. कर्बला की ऐतिहासिक जंग में हुई इस शहादत का शिया समाज में बहुत बड़ा मजहबी महत्व है. सरकार नहीं चाहती थी कि इन पारंपरिक शोक सभाओं और धार्मिक आयोजनों में कोई बाधा आए, इसलिए अंतिम संस्कार को मुहर्रम के बाद कराने का फैसला लिया गया.
अली खामेनेई ने करीब 37 सालों तक ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में देश की कमान संभाली थी. यही वजह है कि उनकी अंतिम विदाई के मौके पर ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से लगभग दो करोड़ लोगों के तेहरान और मशहद पहुंचने का अनुमान है. इतने बड़े जनसैलाब को संभालना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. इसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक रूट और लोगों के रहने-खाने के इंतजामों को लेकर अभी से बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.
Our martyr, The Supreme Leader Ali Khamenei will be buried on July 9. pic.twitter.com/gpmH2YpzDU
— Daily Iran News (@DailyIranNews) June 13, 2026
अगर इस पूरे घटनाक्रम के बैकग्राउंड पर नजर डालें, तो ईरान के हालात पिछले कुछ महीनों से काफी तनावपूर्ण रहे हैं. इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक बड़े संयुक्त सैन्य हमले में सेंट्रल तेहरान स्थित अली खामेनेई के आवास को निशाना बनाया गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी. इस घटना के बाद से ही पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी रही.
शुरुआती योजना के तहत 4 मार्च को ही उनका राजकीय अंतिम संस्कार किया जाना था, लेकिन क्षेत्र में छिड़े भीषण युद्ध और सुरक्षा कारणों के चलते प्रशासन को इसे मजबूरी में स्थगित करना पड़ा था. अब स्थितियां थोड़ी नियंत्रण में आने और मुहर्रम के बीतने के बाद नई तारीखें तय की गई हैं. तेहरान से लेकर मशहद तक होने वाले इस महा-आयोजन पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.