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मध्य पूर्व में ईरान और कतर के बीच 3 लड़ाकू पायलटों को लेकर विवाद गहरा गया है. ईरान का दावा है कि मार्च के सैन्य मिशन के दौरान कतर ने उसके तीन फाइटर पायलटों को जिंदा हिरासत में ले लिया था.
ईरान और कतर के बीच तीन ईरानी फाइटर पायलटों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. तेहरान ने कतर पर आरोप लगाया है कि उसने उसके तीन सैन्य पायलटों को जिंदा पकड़ रखा है. हालांकि, कतर सरकार ने शनिवार (15 अगस्त 2026) को इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसकी हिरासत में कोई भी ईरानी पायलट नहीं है. कतर के रक्षा अधिकारियों का कहना है कि चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान उन्हें सिर्फ एक पायलट का शव मिला है, जबकि बाकी दावों में कोई सच्चाई नहीं है.
यह पूरा मामला इस साल मार्च के महीने में हुए एक सैन्य तनाव से जुड़ा हुआ है. उस वक्त मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हालात काफी नाजुक बने हुए थे. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, 16 मार्च 2026 को ईरानी वायुसेना का एक दस्ता कतर में स्थित एक सैन्य ठिकाने पर कार्रवाई के लिए निकला था. ईरान का दावा है कि इस गुप्त मिशन के दौरान उसके लड़ाकू विमानों को निशाना बनाकर गिरा दिया गया था.
विमान क्रैश होने से ठीक पहले तीनों पायलट इजेक्ट होकर सुरक्षित जमीन पर उतर गए थे. तेहरान का कहना है कि कतर के सुरक्षा बलों ने उन तीनों पायलटों को जिंदा हिरासत में ले लिया था और तब से वे वहीं बंद हैं. अपनी बात को मजबूत करने के लिए ईरान ने रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति से भी संपर्क साधा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत पायलटों की रिहाई कराई जा सके.
दूसरी तरफ, दोहा में कतर के विदेश और रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि मार्च में अज्ञात ईरानी विमानों ने उनके एयरस्पेस का उल्लंघन किया था. कतर के एयर डिफेंस सिस्टम ने पायलटों से संपर्क करने और चेतावनी देने की कई बार कोशिश की, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया. अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कतर ने उन जेट्स को मार गिराया.
कतर के अधिकारियों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद जब उनके सर्च एंड रेस्क्यू दल ने मलबे वाले इलाके की छानबीन की, तो उन्हें केवल एक पायलट की बॉडी बरामद हुई. कतर ने औपचारिक रूप से तेहरान को इस शव को ले जाने और साझा जांच प्रक्रिया में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन ईरान की तरफ से उस समय कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला.
जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, अगर युद्ध या संघर्ष के दौरान सैन्यकर्मी पकड़े जाते हैं, तो उन्हें प्रिजनर्स ऑफ वॉर का दर्जा मिलता है. अगर कतर के पास सच में कोई जिंदा पायलट नहीं है, तो ईरान का अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने का यह प्रयास दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में भारी दरार डाल सकता है.
फिलहाल करीब पांच महीने बीत जाने के बाद भी यह रहस्य बना हुआ है कि क्या सच में पायलट जिंदा हैं या फिर यह महज एक कूटनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है. दोनों देशों के बयानों में यह विरोधाभास आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति को और गर्म कर सकता है.