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एक रिपोर्ट के अनुसार, कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग और शेल कंपनियों के जरिए अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अरबों डॉलर का गुप्त लेनदेन कर रहा है.
Scott Bessent Statement US Treasury: कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान से जुड़े अरबों डॉलर हर साल अमेरिकी बैंकों के खातों के जरिए गुप्त रूप से जा रहे हैं. 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान विदेशी बैंकों के माध्यम से अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक अप्रत्यक्ष पहुंच बना रहा है. इसके लिए वह 'कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग' व्यवस्था का इस्तेमाल करता है, जिसके जरिए ऐसे विदेशी बैंक सीमा पार डॉलर में लेनदेन करते हैं जिनकी अमेरिका में सीधे मौजूदगी नहीं होती.
जांच के अनुसार, ईरानी संस्थाएं अपनी पहचान छिपाने के लिए फ्रंट कंपनियों, करेंसी एक्सचेंज और चीन व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत अन्य देशों में मौजूद कारोबारी साझेदारों का सहारा लेती हैं. इसके बाद विदेशी बैंक अपने अमेरिकी साझेदार बैंकों के जरिए डॉलर में लेनदेन करते हैं, लेकिन इनमें ईरान का संबंध उजागर नहीं होने दिया जाता. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2024 के दौरान करीब 9 अरब डॉलर की ऐसी राशि की पहचान की, जिसका संबंध सीधे तौर पर ईरान से था और जो अमेरिकी बैंकों के जरिए गुजरी.
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है. इससे अमेरिकी प्रतिबंध प्रणाली की खामियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी कड़ी में, 28 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मिस्र के सरकारी बैंक 'बैंक मिस्र' की यूएई शाखा को अमेरिकी कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग सेवाओं से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है.
विभाग ने इस शाखा को 'मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रमुख चिंता वाला वित्तीय संस्थान' करार दिया. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इस शाखा ने ईरान के कथित शैडो बैंकिंग नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों के लिए लगभग 1.8 अरब डॉलर अमेरिकी कॉरेस्पॉन्डेंट खातों के जरिए ट्रांसफर किए.
ट्रेजरी विभाग ने बताया कि बैंक मिस्र की यूएई शाखा के डॉलर खाते तीन अमेरिकी बैंकों में थे, हालांकि उनके नाम गुप्त रखे गए हैं. लेकिन बैंक की वेबसाइट पर जेपी मॉर्गन चेज और सिटीग्रुप को उसके कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग साझेदारों में शामिल बताया गया है, जिन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. यह कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य ईरान की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच खत्म करना और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर कार्रवाई करना है.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की मदद करने वाले संस्थान अमेरिकी डॉलर और वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाए नहीं रख सकते. ट्रेजरी ने बैंकों को अस्पष्ट स्वामित्व वाली कंपनियों, हांगकांग में पंजीकृत लेकिन चीनी बैंकों के खातों का इस्तेमाल करने वाली फर्मों और यूएई की ऐसी कंपनियों के प्रति चेतावनी दी है जिनकी व्यावसायिक गतिविधियां स्पष्ट नहीं हैं.
हालांकि, ईरान ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए चीनी युआन और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल बढ़ाया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तकनीक की खरीद और सैन्य उपकरणों के लिए उसे अब भी डॉलर आधारित लेनदेन की जरूरत पड़ती है. अमेरिकी कानून के तहत अमेरिकी नागरिकों और संस्थानों को प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ वित्तीय लेनदेन की अनुमति नहीं है. साथ ही, विदेशी बैंकों को भी चेतावनी दी गई है कि यदि वे जानबूझकर ईरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करेंगे तो उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता है.