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Iran Israel Conflict: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) एक शक्तिशाली सैन्य संगठन है, जिसकी ट्रेनिंग हिजबुल्ला-हमास जैसी है लेकिन इसका मिशन देश की सेना से कहीं आगे है.आइए आज जनते हैं इरनाई सेना से ये कितना अलग है.
ईरान और इज़रायल के बीच सैन्य संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. इसी बीच, कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की नियमित सेना से कितनी अलग है. आज हम आपको बताएंगे कि परमाणु ठिकानों से लेकर मिसाइल प्रणाली की सुरक्षा करने वाली यह संस्था आखिर इतनी ताकतवर कैसे बन गई. यह महज एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि ईरान के इस्लामिक शासन की रीढ़ है. इसका गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खोमैनी ने किया था. इसका उद्देश्य था इस्लामिक क्रांति की रक्षा और देश में चल रही आंतरिक विरोध को खत्म करना. आज, IRGC सिर्फ घरेलू सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शाखाएं मिडिल ईस्ट के कई देशों तक फैली हुई हैं. इसकी ट्रेनिंग हिजबुल्ला और हमास जैसे संगठनों जैसी होती है, लेकिन इसका मिशन उनसे कहीं बड़ा और संगठित है.
ईरान की सेना और IRGC में बड़ा अंतर है. सेना जहां एक परंपरागत रक्षा बल है, वहीं IRGC एक वैचारिक, राजनीतिक और सैन्य ताकत है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक शासन की रक्षा करना है. हाल ही में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों में IRGC के कई शीर्ष अधिकारी मारे गए हैं, जिनमें प्रमुख कमांडर हुसैन सलामी, एयरोस्पेस कमांडर आमिर अली हाजीजादेह, और खतम अल-अनबिया के प्रमुख गुलाम अली रशीद शामिल हैं.
आपको बता दें, IRGC की सबसे प्रभावशाली शाखा है कुद्स फोर्स, जो विदेशी अभियानों में सक्रिय रहती है. यह फोर्स लेबनान में हिजबुल्ला, गाजा में हमास और यमन में हूती जैसे संगठनों को ट्रेनिंग और संसाधन मुहैया कराती है. IRGC का मिशन सिर्फ ईरान की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि शिया विचारधारा को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत करना है.
मूल रूप से इस संगठन का दखल ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और राजनीति तक है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इसके लगभग 190,000 सक्रिय सदस्य हैं और इसकी मौजूदगी सीरिया, इराक, यमन और अफ्रीका के कई हिस्सों में देखी जाती है. रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि IRGC, हिजबुल्ला और हमास जैसी ही रणनीति अपनाता है, लेकिन उसका कामकाज कहीं अधिक संगठित और व्यापक होता है. यही वजह है कि उसे ईरान की पारंपरिक सेना से ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है.
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