दुनिया
खुफिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इराक के प्रमुख शिया मिलिशिया संगठन जैसे- कताइब हिज़्बुल्लाह, और हरकत हिज़्बुल्लाह अल-नुजाबा जैसे संगठन हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर सऊदी अरब पर हमला कर सकते हैं.
सऊदी अरब को खुफिया रिपोर्ट मिली है कि उस पर दो तरफ से हमला हो सकता है. सऊदी की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने रिपोर्ट दी है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की देखरेख में, ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया और यमन हूती विद्रोही मिलकर सऊदी अरब पर हमले करने की तैयारी कर रहे हैं. सऊदी अरब को ये खुफिया रिपोर्ट ऐसे समय में मिली है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर है. लाल सागर में हूती विद्रोही मोर्चा खोल चुके हैं और सऊदी अरब भी ईराक में हवाई हमले कर रहा है.
CNN ने अपनी रिपोर्ट में सऊदी अरब के शीर्ष अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इराकी मिलिशिया, हूती गुट के साथ मिलकर बहुत जल्द सऊदी अरब पर हमले करने की योजना बना रहे हैं. इराक के शिया मिलिशिया और यमन के हूती विद्रोही, दोनों को ही ईरान का प्रॉक्सी माना जाता है. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान इस युद्ध में सऊदी अरब को भी खींचना चाहता है. ऐसा हुआ तो अमेरिका-ईरान की जंग पूरे क्षेत्र में फैल जाएगी.
CNN की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सऊदी के तेल और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है. हूती विद्रोही और इराकी मिलिशिया सऊदी अरब के कमर्शियल बंदरगाह, हवाई अड्डे और देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. सऊदी को ये भी जानकारी मिली है कि इस कथित ऑपरेशन से जुड़े ड्रोन और मिसाइलों को लॉन्च करने की जगह पर पहुंचा दिया गया है.
हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने सउदी अरब के दक्षिणी प्रांत नजरान पर हमला किया था. इस हमले में एक 4 साल के बच्चे सहित 11 नागरिक घायल हो गए थे. सउदी अधिकारियों का मानना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों और तनाव कम करने के लिए हो रही बातचीत को
बाधित करना है.
सउदी अरब ने इस समय अपनी सेना और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा है. सउदी अरब पहले से ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड के साथ खुफिया जानकारी और सैन्य अभियान के स्तर पर मिलकर काम कर रहा है. हाल ही में सऊदी बलों ने अमेरिकी सेना के साथ मिलकर इराक में मौजूद संदिग्ध मिलिशिया ठिकानों पर हमले भी किए थे. सऊदी ने ऐसे ही किसी संभावित युद्ध को देखते हुए पाकिस्तान से रक्षा समझौता किया था. अब अगर सऊदी इराक और यमन में सैन्य कार्रवाई करता है तो इसमें पाकिस्तान की सेना भी सीधे शामिल हो सकती है.
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पहले ही होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली सप्लाई प्रभावित है. अगर सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच युद्ध छिड़ा तो लाल सागर से होने वाला समुद्री व्यापार भी प्रभावित होगा. इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछल सकती हैं. यमन में लागू युद्धविराम पूरी तरह से टूट सकता है और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है.