Advertisement

1558 उड़ानें रद्द... 1.70 लाख यात्री फंसे, इंडोनेशिया में ये कैसे तबाही? 50 हजार फीट ऊंचाई तक पहुंची राख

Indonesia Volcanic Eruption: इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद उसकी राख करीब 50 हजार फीट ऊंचाई तक पहुंची, जिस कारण 8 एयरपोर्ट बंद कर दिए गए और 1550 के करीब उड़ानें रद्द कर दी गईं हैं. वहीं सिंगापुर एयरलाइंस ने भी अपनी आज की उड़ानें कैंसिल कर दी है.

Latest News
1558 उड़ानें रद्द... 1.70 लाख यात्री फंसे, इंडोनेशिया में ये कैसे तबाही? 50 हजार फीट ऊंचाई तक पहुंची राख

इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी (इमेज क्रेडिट - X)

Add DNA as a Preferred Source
  • इंडोनेशिया में ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद उड़ानें रद्द कर दी गई हैं 
  • 8 एयरपोर्ट बंद कर दिए गए हैं और करीब 1550 उड़ानें रद्द की गई हैं 
  • विस्फोट के बाद उसकी राख 50000 फीट ऊंचाई तक पहुंची
  • जिस कारण सुरक्षा के लिए उड़ानें रद्द की गईं हैं. 

 
Indonesia Volcanic Eruption: इंडोनेशिया में ज्वालामुखी में भारी तबाही मचाई है. एक ज्वालामुखी शुक्रवार से कई बार फटा है, जिससे राख आसमान में 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गई और 8 एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा, जिसमें जकार्ता के दोनों प्रमुख मुख्य हवाई अड्डे भी शामिल हैं.  ज्वालामुखी विस्फोट के कारण 1550 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं हैं और इस कारण 1.70 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं. 

आज सुबह तक कुल प्रभावित उड़ानों की संख्या और बढ़ गई. जकार्ता का मुख्य सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बंद है. इंडोनेशिया के माउंट अनाक क्राकाटाऊ में शुक्रवार से ही हलचल बढ़ गई थी. ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी के अनुसार रविवार तड़के करीब 3:53 बजे ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ, जो लगभग 30 सेकंड तक चला. इसके करीब तीन घंटे बाद एक और विस्फोट हुआ. एजेंसी की वेबसाइट के मुताबिक रविवार रात 8:23 बजे भी विस्फोट दर्ज किया गया. अधिकारियों ने लोगों को ज्वालामुखी के क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है. 

 50 हजार फीट तक पहुंची ज्वालामुखी की राख

ज्वालामुखी से निकली राख के कम से कम दो बड़े बादल सैटेलाइट से देखे गए. इनमें से एक राख का गुबार करीब 20,000 फीट की ऊंचाई तक गया और जकार्ता, बैंटेन व पश्चिमी जावा के ऊपर फैल गया. दूसरा और ज्यादा ऊंचाई वाला राख का गुबार करीब 50,000 फीट तक पहुंचा. यह बैंटेन, लैम्पुंग और बेंकुलु के कुछ हिस्सों, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर की ओर फैल गया.

क्यों रद्द की गई उड़ानें?

ज्वालामुखीय राख विमानों के लिए बहुत खतरनाक मानी जाती है. राख के महीन कण विमान के इंजन को नुकसान पहुंचाते हैं और उड़ान के दौरान इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. इसी वजह से राख से प्रभावित एयरस्पेस में उड़ानों को रद्द किया गया है. 

कौन-कौन से एयरपोर्ट हुए प्रभावित?

जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा और हलिम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट के साथ-साथ 6 अन्य एयरपोर्ट, जिनमें लैम्पंग का राडिन इंटेन II एयरपोर्ट भी शामिल है. आस-पास का एयरस्पेस बंद कर दिया गया था. इन सभी 8 एयरपोर्ट को आज सुबह 8:59 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया गया था, हालांकि जकार्ता के मुख्य एयरपोर्ट ऑपरेटर ने बाद में इंस्टाग्राम पर बताया कि सोएकार्नो-हट्टा स्थानीय समयानुसार शाम 6 बजे तक बंद रहेगा.

बाली के मुख्य एयरपोर्ट और मेडन में भी सेवाएं बाधित हुईं हैं. परिवहन मंत्री डुडी पुरवागांधी ने कहा कि बदलते मौसम के कारण यह बताना मुश्किल है कि हालात कब सामान्य होंगे. तेज हवा और सूखे मौसम के कारण राख अलग-अलग दिशाओं में फैल रही है, जिससे एयर ट्रैफिक को दोबारा शुरू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.

अन्य शहरों पर भी असर

ज्वालामुखी की राख का असर सिर्फ जकार्ता तक सीमित नहीं रहा. बाली के आई गुस्ती न्गुराह राय इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी जकार्ता आने-जाने वाली कई उड़ानें रद्द हुईं हैं. यात्रियों को एयरपोर्ट पर घंटों इंतजार करना पड़ा. एयरपोर्ट बंद होने और उड़ानें रद्द होने से बड़ी संख्या में यात्री फंस गए हैं. परिवहन मंत्री ने भी यात्रियों से स्थिति को देखते हुए धैर्य रखने की अपील की है.

स्कूलों पर भी ज्वालामुखी का असर

ज्वालामुखीय राख का असर स्कूलों पर भी पड़ा है. राख से प्रभावित जकार्ता, लैम्पुंग और आसपास के इलाकों में कुछ स्कूलों ने बच्चों को राख के संपर्क में आने से बचाने के लिए ऑनलाइन क्लासेस शुरू की हैं. प्रशासन ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है, क्योंकि हवा में मौजूद राख आंखों और सांस की समस्या पैदा कर सकते हैं. 

सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ाने भी रद्द 

ज्वालामुखी की राख के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं. सिंगापुर एयरलाइंस ने 7 सितंबर को सिंगापुर-जकार्ता रूट की कई उड़ानें रद्द कर दी हैं. एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वह फ्लाइट की स्थिति की जानकारी लेते रहें, क्योंकि मौसम और राख के फैलाव के कारण स्थिति तेजी से बदल सकती है.

एजेंसी ने दी ये चेतावनी 

इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने कहा कि जुलाई से ज्वालामुखी में हलचल बढ़ गई है और रविवार का विस्फोट इस दौरान सबसे तेज था. उन्होंने कहा कि इस पैटर्न से पता चलता है कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस की लगातार आपूर्ति हो रही है. निगरानी एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और विस्फोट होने की संभावना है.

2018 में हुई थी भारी तबाही 

माउंट अनाक क्राकाटाऊ का इतिहास बहुत डरावना रहा है. यह उसी क्षेत्र में स्थित है जहां ऐतिहासिक क्राकाटोआ ज्वालामुखी का 1883 का विनाशकारी विस्फोट हुआ था. अनाक क्राकाटाऊ 2018 में भी बड़े विस्फोट के बाद सुर्खियों में आया था. उस समय इसके कारण समुद्र में सुनामी आई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.

ये भी पढ़ें - क्या राजा और चन्नी को एक साथ कर पाएंगे सचिन पायलट...पंजाब कांग्रेस नए प्रभारी के सामने क्या-क्या हैं चुनौतियां?

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement