दुनिया
दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच इंडोनेशिया वैश्विक ईवी सप्लाई चेन का सबसे बड़ा किंगमेकर बनकर उभरा है.
दुनिया भर में इस समय इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है. भारत समेत कई देश प्रदूषण कम करने और पेट्रोल-डीजल पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए ईवी को बढ़ावा दे रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की इस पूरी ईवी इंडस्ट्री की चाबी एक ऐसे देश के पास है, जिसके बिना भविष्य की गाड़ियों की कल्पना भी नहीं की जा सकती? वह देश है इंडोनेशिया. पीएम मोदी 8 जुलाई तक इसी देश के दौरे पर हैं. आपको बताते हैं कि इंडोनेशिया के पास ऐसा क्या है जिसने उसे ईवी की दुनिया का किंगमेकर बना दिया है, और भारत की बैटरी व ईवी पॉलिसी के लिए इसके क्या मायने हैं.
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा निकल (Nickel) का भंडार है. जब हम इलेक्ट्रिक गाड़ी की बात करते हैं, तो उसकी सबसे महंगी और जरूरी चीज होती है उसकी बैटरी, जिसे लिथियम-आयन बैटरी कहा जाता है. इस बैटरी को बनाने के लिए निकल एक सबसे जरूरी और मुख्य कच्चा माल है.
निकल की वजह से ही बैटरी में ज्यादा एनर्जी स्टोर हो पाती है, जिससे गाड़ियां एक बार चार्ज होने पर लंबी दूरी तय कर सकती हैं. आज दुनिया में जितना भी निकल इस्तेमाल हो रहा है, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा अकेले इंडोनेशिया सप्लाई करता है. सीधे शब्दों में कहें तो इंडोनेशिया के निकल के बिना दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कार कंपनियों के ईवी प्लांट ठप पड़ सकते हैं.
भारत सरकार देश को दुनिया का बड़ा ईवी हब बनाना चाहती है. इसके लिए सरकार ने फेम स्कीम, पीएलआई स्कीम और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज जैसी नीतियां लागू की हैं. भारत का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में सड़कों पर चलने वाली ज्यादातर गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों और उनकी बैटरियां भारत में ही बनें.
लेकिन भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हमारे पास लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे जरूरी खनिजों के प्राकृतिक भंडार बहुत सीमित हैं या न के बराबर हैं. ऐसे में भारत की पूरी बैटरी और ईवी नीति के सफल होने के लिए इंडोनेशिया के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते होना बेहद जरूरी हो जाता है.
भारत में जब तक बैटरी बनाने की लागत कम नहीं होगी, तब तक आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर खरीदना बजट में नहीं आएगा. अगर भारत को इंडोनेशिया से सही कीमत पर और बिना किसी रुकावट के निकल मिलता रहता है, तो देश के भीतर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बहुत बढ़ावा मिलेगा.
भारत सरकार अब अपनी नीतियों के तहत क्रिटिकल मिनरल्स को सुरक्षित करने के लिए विदेशों में साझेदारी कर रही है. इंडोनेशिया से निकल का मिलना भारत को चीन जैसे देशों पर निर्भर होने से बचाएगा, जो इस समय पूरी दुनिया की ईवी सप्लाई चेन पर कब्जा जमाए बैठे हैं. इंडोनेशिया ने अपनी एक खास नीति के तहत कच्चे निकल के निर्यात पर रोक लगा रखी है. वे चाहते हैं कि विदेशी कंपनियां उनके देश में आकर ही बैटरी के कारखाने लगाएं.
भारत सरकार और भारतीय कंपनियां भी अब इंडोनेशिया में निवेश करने और वहां से खनिज समझौते करने की कोशिशों में जुटी हैं. भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों देशों ने ईवी इकोसिस्टम और कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सहमति जताई थी. साफ है कि अगर भारत को अपनी ईवी और आत्मनिर्भर बैटरी नीति को पूरी तरह कामयाब बनाना है, तो इंडोनेशिया के निकल साम्राज्य के साथ तालमेल बिठाकर चलना ही होगा.
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