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इजराइल–ईरान संघर्ष के बीच लगभग 1,500 भारतीय छात्र ईरान में फंसे हुए हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुरोध पर, ईरान ने अरमेनिया की नॉरदुज़ सीमा (Norduz checkpoint) से छात्रों को बसों से बाहर निकालने की अनुमति दी है.
इजराइल–ईरान संघर्ष के बीच लगभग 1,500 भारतीय छात्र ईरान में फंसे हुए हैं . भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुरोध पर, ईरान ने अरमेनिया की नॉरदुज़ सीमा (Norduz checkpoint) से छात्रों को बसों से बाहर निकालने की अनुमति दी है. कुल मिलाकर लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में मौजूद हैं, जिनमें अधिकांश छात्रों को सबसे पहले निकाला जाना है .
अरमेनिया रास्ता निकासी
ईरान के सभी एयरपोर्ट बंद हैं, लेकिन लैंड बॉर्डर खुले हैं. यही वजह है कि भारत–ईरान–अरमेनिया रास्ता निकासी का सबसे सुरक्षित विकल्प बन गया है . विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी भारतीय नागरिकों को इस सीमा से पहले अपनी जानकारी जैसे नाम, पासपोर्ट नंबर, गाड़ी विवरण, निकासी समय और चुने गए सीमा बिंदु. ईरान के जनरल प्रोटोकॉल विभाग को राजनयिक चैनलों से भेजनी होगी .
इजराइल ने ईरान पर किया हवाई हमला
13 जून की रात से इजराइल ने ईरान में हवाई हमले शुरू किए, जिनमें नाभिकीय स्थलों और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया . मानवाधिकार समूहों के अनुसार, केवल इजरान में ही इन हमलों में कम से कम 406 लोगों की मौत और लगभग 654 घायल हुए हैं.
ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने इजराइल को भी निशाना बनाया है. इसमें कम से कम 14 लोग मारे गए और लगभग 390 लोग ज़ख्मी हुए हैं. ये चार दिन में सबसे बड़े पैमाने पर हवाई हमले और मिसाइल हमले हैं .
भारत सरकार की भूमिका
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि दूतावास छात्रों का सुरक्षा और निकासी के मद्देनजर लगातार संपर्क में है. मामले पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर अरमेनिया के विदेश मंत्री से संपर्क में हैं ताकि सीमा पार सहयोग और लॉजिस्टिक्स सुचारू रूप से काम करें . सरकार ने सुनिश्चित किया है कि छात्र Google फॉर्म, हेल्पलाइन नंबर और ईरान स्थित सोशल मीडिया चैनलों के जरिए लगातार अपडेट रखें .
संघर्ष का मानवीय चेहरा
इस टकराव की चौथे दिन तक स्थिति गंभीर बनी हुई है . इजराइली हमलों में ईरान में कई जरूरी तकनीकें बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए हैं. वहीं इजराइल में निरंतर मिसाइल हमलों ने तीस से अधिक लोगों की जान ली है और कई घायल हुए हैं.
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