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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ कानून बन चुका है, लेकिन भारतीय मूल के छह सांसदों ने इसे गरीबों के खिलाफ बताते हुए इसका जोरदार विरोध किया.
अमेरिकी समयानुसार शुक्रवार शाम वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर आधिकारिक रूप से दस्तखत कर दिए. व्हाइट हाउस के लॉन में जहां एक ओर स्वतंत्रता का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में इस नए कानून को लेकर चिंता और आक्रोश साफ दिखाई दिया. यह बिल टैक्स कटौती, बॉर्डर सिक्योरिटी और व्यवसायिक प्रोत्साहन जैसे लक्ष्यों को पूरा करने का दावा करता है, लेकिन इसके सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
इस बिल का सबसे मुखर विरोध भारतीय मूल के छह अमेरिकी सांसदों ने किया है, जिन्हें सामूहिक रूप से "समोसा कॉकस" कहा जाता है. इस समूह में रो खन्ना, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, राजा कृष्णमूर्ति, सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार शामिल हैं. इन नेताओं ने इस कानून को "नैतिक विफलता" और "गरीबों के साथ धोखा" करार दिया.
राजा कृष्णमूर्ति, जिन्होंने 'समोसा कॉकस' शब्द गढ़ा था, ने कहा, “मैं 14 घंटे ड्राइव करके सिर्फ इसलिए वाशिंगटन आया, ताकि इस जालिम बिल का विरोध कर सकूं. यह कानून करोड़ों लोगों से हेल्थकेयर छीनता है और अमीरों को फायदा पहुंचाता है.”
इस कानून में हेल्थ और फूड सपोर्ट जैसे कार्यक्रमों की फंडिंग में कटौती की गई है. मिशिगन के कांग्रेसमैन श्री थानेदार ने बताया कि उनके जिले में 47% लोग मेडिकएड और 29% लोग SNAP (फूड सपोर्ट) पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा, "मेरे लिए इस बिल के खिलाफ वोट देना अब तक का सबसे आसान निर्णय था."
कैलिफोर्निया से प्रतिनिधित्व कर रहे डॉक्टर अमी बेरा ने चिंता जताई कि केवल उनके राज्य में ही 20 लाख लोग इस कानून से प्रभावित होंगे. उनके अनुसार, यह बिल यूनिवर्सल हेल्थकेयर की दिशा में अब तक हुई सारी मेहनत को खत्म कर देता है.
कांग्रेसनल बजट ऑफिस की रिपोर्ट के अनुसार, यह कानून अगले 10 वर्षों में अमेरिका का बजट घाटा $4.5 ट्रिलियन तक बढ़ा सकता है. वहीं, इसमें एक नया प्रावधान भी जोड़ा गया है – विदेशों में भेजी जाने वाली राशि (Remittance) पर 1% टैक्स लगाया जाएगा, जिससे सरकार को $10 बिलियन की आमदनी की उम्मीद है.
ट्रंप समर्थक इस बिल को अमेरिका के ‘नए स्वर्ण युग’ की शुरुआत बता रहे हैं. ट्रंप ने इसे अपने चुनावी वादों की पूर्ति का प्रतीक बताया और कहा कि इससे अमेरिका को फिर से महान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता और समोसा कॉकस जैसे समूह इसे गरीबों और जरूरतमंदों के खिलाफ उठाया गया क्रूर कदम मानते हैं.